नागौर जिले के आधा दर्जन गांवों में भूमि अधिग्रहण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल लिमिटेड (RSMML) द्वारा जिप्सम खनन के लिए प्रस्तावित भूमि अवाप्ति के विरोध में 6 गांवों के ग्रामीण पिछले छः दिनों से अनवरत धरने पर बैठे हैं। किसानों ने प्रशासन पर ‘धोखे से सर्वे’ करने का गंभीर आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। फसल मुआवजे के नाम पर छल का आरोप संघर्ष सेवा समिति के सचिव श्रवण लाल सुथार के नेतृत्व में पिलनवास, मकोड़ी, ढकोरिया, गंठिलासर, बालासर और भदवासी के ग्रामीण गांव की गौशाला के बाहर डटे हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि RSMML के कर्मचारियों ने गांव में आकर फसल खराबे के मुआवजे का झांसा देकर सर्वे किया और किसानों के हस्ताक्षर करवा लिए। बाद में खुलासा हुआ कि इसे जमीन अधिग्रहण की ‘सहमति’ के रूप में पेश किया गया है। समिति के अनुसार, 557 किसानों की 463 हेक्टेयर भूमि पर इस अधिग्रहण की तलवार लटक रही है। प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोश आंदोलनकारियों का कहना है कि वे 14 तारीख को जिला कलेक्टर से मिलकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं, लेकिन 6 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। किसानों के अनुसार, इस क्षेत्र में जिप्सम के साथ-साथ पोटाश और लिथियम जैसे बहुमूल्य खनिज हैं, लेकिन यह उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। एक महीने का अल्टीमेटम: फिर होगा आमरण अनशन किसान संघर्ष समिति ने रणनीति साझा करते हुए बताया कि फिलहाल यह शांतिपूर्ण धरना एक महीने तक चलेगा। यदि इस अवधि में सरकार ने अधिग्रहण का नोटिफिकेशन रद्द नहीं किया, तो ग्रामीण सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे। किसानों ने दो टूक कहा कि इसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। कलेक्टर बोले: वार्ता से निकालेंगे समाधान इस मामले पर नागौर जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने बताया कि ग्रामीणों का ज्ञापन प्राप्त हुआ है और उनकी मांगों से RSMML प्रबंधन को अवगत करा दिया गया है। प्रशासन जल्द ही किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता कर बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करेगा।


