प्राइवेट एंबुलेंस की मनमानी:जगह देने की बात पर 108 एम्बुलेंस पायलट को जड़ा थप्पड़, हॉस्पिटल में हंगामा

जिला हॉस्पिटल में प्राइवेट एंबुलेंस की मनमानी बढ़ती जा रही है। जगह देने की मामूली बात पर प्राइवेट एंबुलेंस के ड्राइवर ने 108 एंबुलेंस के पायलट को थप्पड़ जड़ दिया। जिसको लेकर हॉस्पिटल में हंगामा हो गया। यहां तक कि सभी 108 एंबुलेंस नाराज होकर एक साथ सदर थाने में पहुंचे। जहां पुलिस को परिवाद सौंपा गया। इधर, 108 एंबुलेंस के ड्राइवर्स का कहना है कि पुलिस उनसे समझौते के लिए दबाव बना रही है। वहीं यह भी बताया जा रहा है कि झगड़े के दौरान प्राइवेट एंबुलेंस के ड्राइवर और उनके दो साथी नशे में भी थे। पुलिस ने भी कहा प्राइवेट एंबुलेंस के ड्राइवर की गलती दरअसल, 108 एंबुलेंस के पायलट सोनू कुमार पुत्र लाडू शर्मा पुरानी पुलिया के यहां से पेशेंट लेकर जिला हॉस्पिटल पहुंचे। एंबुलेंस को साइड में खड़ी कर दी। 108 एंबुलेंस के आगे एक प्राइवेट एंबुलेंस भी खड़ी थी। इसी दौरान पीछे से एक गाड़ी आने पर 108 एम्बुलेंस के पायलट सोनू कुमार ने प्राइवेट एंबुलेंस के ड्राइवर मिट्ठू लाल गुर्जर को गाड़ी आगे लेने की बात कही। नशे में धूत प्राइवेट एम्बुलेंस के ड्राइवर को इस बात से इतना गुस्सा आया कि उन्होंने पहले सोनू शर्मा को गाली देना शुरू कर दिया। जब उन्हें रोका गया तो मिट्ठू लाल गुर्जर गुस्से में आया और सोनू शर्मा को थप्पड़ मार दिया। 108 एम्बुलेंस के पायलट सोनू शर्मा ने तुरंत सदर थाना पुलिस को इस बात की जानकारी दी और अन्य 108 एंबुलेंस के ड्राइवर को भी मौके पर बुलाया। सभी एंबुलेंस लेकर सदर थाना पहुंचे और वहां पर प्राइवेट एंबुलेंस के ड्राइवर के खिलाफ एक रिपोर्ट दी गई। थानाधिकारी निरंजन प्रताप सिंह ने बताया कि यह मामला उनके सामने आया है। इसमें पूरी तरह से प्राइवेट एंबुलेंस ड्राइवर की ही गलती है। इसमें सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं 108 एंबुलेंस वालों का कहना है कि उनपर पुलिस समझौता करने का दबाव बना रही है। एंबुलेंस के ड्राइवर्स के नशा करने पर कार्रवाई क्यों नहीं? नियमों की पालना करना तो दूर अब मरीजों को एंबुलेंस में ले जाना भी खतरा साबित होने लगा है। शाम होते ही कई ड्राइवर नशे में धूत होते है। ऐसे में मरीजों को एंबुलेंस में ले जाना भी खतरा है। जबकि ड्रिंक करके ड्राइव करना नियमों के सख्त खिलाफ होता है। यहां तो एम्बुलेंस ड्राइवर को सख्त मनाई होनी चाहिए। लेकिन भर्ती के समय इन चीजों का ध्यान भी नहीं दिया जा रहा है और ना ही इन्हें रोका जा रहा है। बता दे कि इससे पहले भी कई परिजनों ने भी इस बात की शिकायत की थी लेकिन ना हॉस्पिटल प्रशासन और ना ही जिला प्रशासन की ओर से इस और ध्यान दिया जा रहा है।

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