मुरैना जिला अस्पताल प्रबंधन का एक अमानवीय चेहरा सामने आया है। यहां प्रबंधन ने एक प्राइवेट एम्बुलेंस को परिसर में अंदर आने की इजाजत नहीं दी, जिसके चलते परिजनों को एक्सीडेंट में घायल मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ा। मरीज को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर के एक निजी अस्पताल ले जाया जा रहा था। मामला सामने आने के बाद ADM ने इसे गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है। दिमनी विधानसभा के लहर गांव निवासी जगदीश गुर्जर का 5 अक्टूबर को गांव में ही बाइक फिसलने से एक्सीडेंट हो गया था। इस हादसे में उनके पैर में दो जगह फ्रैक्चर हो गया था, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर ले जा रहे थे
घायल जगदीश के बेटे श्यामू गुर्जर ने बताया कि जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भी पिताजी को आराम नहीं मिल रहा था। इसलिए सभी परिवार वालों और रिश्तेदारों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर के एक निजी अस्पताल में ले जाने का फैसला किया था। ‘मजबूरी में मामा को स्ट्रेचर पर रोड तक लाए’
घायल जगदीश के भांजे बंटी गुर्जर के अनुसार, उन्होंने ग्वालियर के एक निजी हॉस्पिटल में बात कर ली थी और 6 अक्टूबर की शाम करीब 5 बजे वे जिला अस्पताल से ग्वालियर के लिए निकले। बंटी ने बताया, “अगर 108 एम्बुलेंस करते तो वह नियम से सरकारी अस्पताल ही छोड़ती। हमको प्राइवेट अस्पताल जाना था, इसलिए मैं बाहर जाकर प्राइवेट एम्बुलेंस करके लाया। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने और पुलिस चौकी पर ड्यूटी दे रहे पुलिसकर्मी ने एम्बुलेंस को अंदर नहीं आने दिया। मजबूरी में हमको मामा को स्ट्रेचर पर ही रोड तक लाना पड़ा।” सिविल सर्जन झल्लाकर बोले- जो छापना हो छाप दो
इस मामले पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. गजेंद्र तोमर ने गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया। उन्होंने कहा, “प्राइवेट एम्बुलेंस अंदर नहीं आएगी। 108 ले जाते, वह छोड़ती। पुलिस से परमिशन लेते तो आ जाती। जिम्मेदारी पुलिस चौकी की है।” जब रिपोर्टर ने पूछा कि 108 तो सरकारी अस्पताल में ही छोड़ेगी और क्या ऐसा कोई आदेश है जिसमें प्राइवेट एम्बुलेंस अंदर न जाए, तो सिविल सर्जन झल्ला कर बोले, “जो छापना हो छाप दो।” एडिशनल एसपी- प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी टाल रहा
एडिशनल एसपी सुरेंद्र प्रताप के अनुसार, “अस्पताल परिसर में बनी चौकी सिर्फ लोगों की सुविधा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए है। पुलिस एम्बुलेंस को क्यों रोकेगी? एम्बुलेंस तो एम्बुलेंस है, क्या सरकारी क्या प्राइवेट। अगर मरीज खुद प्राइवेट एम्बुलेंस से जाना चाहता है तो कोई भी उसे नहीं रोक सकता। अस्पताल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी टाल रहा है।” ADM ने कहा- मामला गंभीर, जांच करवाएंगे
एडीएम अश्वनी कुमार रावत ने बताया, “यदि ऐसा हुआ है तो मामला बेहद गंभीर है। अस्पताल प्रबंधन को ऐसा कोई हक नहीं है कि वह किसी मरीज को एम्बुलेंस सुविधा लेने से रोक सके। मरीज को सरकारी या प्राइवेट, जो भी सुविधा चाहिए, यह उसकी क्षमताओं पर निर्भर है। अगर मरीज प्राइवेट इलाज कराना चाहता है तो यह उसका हक है। आप मुझे मरीज का नाम और जानकारी भेजिए, मैं दिखवाता हूं और जांच करवाऊंगा।”


