प्राची देवी ने सुनाई रुक्मणी विवाह कथा:बोलीं- भगवान तन नहीं, मन की पवित्रता देखते हैं

जिला मुख्यालय के रामलीला मैदान में 12 जनवरी से चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन प्रख्यात कथावाचक प्राची देवी ने भगवान कृष्ण और रुक्मणी विवाह की कथा का वर्णन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। प्राची देवी ने बताया कि भगवान हमेशा हृदय की सुंदरता और मन की पवित्रता को देखते हैं, न कि शारीरिक सुंदरता को। उन्होंने उदाहरण दिया कि गोपियों ने पवित्र हृदय से भगवान कृष्ण को अपना माना, जिसके कारण वे उनकी बांसुरी सुनकर सब कुछ छोड़कर यमुना किनारे चली आती थीं। कथावाचक ने कहा कि भगवान कृष्ण की प्रत्येक लीला में कोई न कोई संदेश छिपा है। गोवर्धन पर्वत उठाने की लीला से हमें पर्यावरण की रक्षा और वृक्षारोपण का संदेश मिलता है। इसी प्रकार, कालिया नाग का मान मर्दन करने से पहले भगवान ने नदी की साफ-सफाई का भी संदेश दिया। प्राची देवी ने बताया कि जिस प्रकार शरीर आत्मा के बिना अधूरा है, उसी तरह श्रीमद् भागवत कथा भगवान कृष्ण की रासलीला के दसवें स्कंध के बिना अधूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि राधा को कृष्ण से अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि कृष्ण ही राधा हैं और राधा ही कृष्ण हैं। वृंदावन की महारास लीला में स्वयं भोलेनाथ भी गोपी बनकर पधारे थे। इसके उपरांत कथावाचक प्राची देवी ने भगवान कृष्ण और रुक्मणी विवाह की कथा का सुंदर वर्णन किया। आज कथा का अंतिम दिवस होगा, जिसमें सुदामा चरित्र की कथा सुनाई जाएगी।

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