गोइंदवाल गांव स्थित शनिगांव में साप्ताहिक धार्मिक समागम में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने शनि देव के दरबार में मत्था टेका। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य सेवादार कर्मजीत सिंह मान की देखरेख में विधिवत हवन-यज्ञ से हुई। इसमें विश्व शांति और जन-कल्याण की मंगल कामना के साथ आहुतियां डाली गईं। इसके पश्चात विशेष आरती हुई और श्रद्धालुओं ने शनि देव पर तेल अर्पित कर अपनी आस्था प्रकट की। समागम को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक गुरु शून्य प्रभु ने कहा कि मनुष्य आज छोटी-छोटी सांसारिक परेशानियों में उलझकर अपनी सोच सीमित कर चुका है। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि उस विराट परमात्मा से मांगना है तो उनका साथ और संरक्षण मांगो। उन नश्वर चीजों के पीछे क्यों भागना, जो कल खत्म हो जाएंगी? प्रभु ने आगे समझाया कि यह पूरी कायनात ईश्वर की देह है। यदि प्रभु के दर्शन करने हैं तो उन्हें पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और दीन-दुखियों में ढूंढें। सृष्टि की सेवा ही सीधे परमात्मा तक पहुंचती है। प्रवचनों के दौरान पूरा परिसर जय शनि देव के जयकारों से गुंजायमान रहा। समागम के समापन पर आयोजित अटूट भंडारे में हजारों की संख्या में संगत ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।


