प्रेम बाईसा का प्रण था, मां का आश्रम बनाऊं:मामा बोले- गला खराब होने से जान नहीं जाती, इंजेक्शन की वजह से बिगड़ी तबीयत

साध्वी प्रेम बाईसा के निधन को लेकर मामा गंगाराम ने कहा- प्रेम बाईसा के माता-पिता सन्यासी बन गए इसके बाद दो की उम्र में ननिहाल में आ गई। माता-पिता भक्ति करने के लिए जोधपुर और बालोतरा जिले की सीमा के गांव जास्ती चले गए। शुरुआती शिक्षा हमारे गांव परेऊ के पास पूनियों की बेरी गांव की सरकारी स्कूल में हुई। मेरी सिस्टर अमरू देवलोक हो गए। फिर बाईसा वहीं पिता वीरमनाथ के साथ रहने लग गई। ननिहाल में रही तब तक उन्होंने सन्यास जैसी बात उन्होंने नहीं बताई। जास्ती में पिता के साथ रहने के बाद जोधपुर में कृपाराम जी महाराज के आश्रम में रही। वहां पर शिक्षा ग्रहण की। आगोलाई गांव के सालूराम की कॉलेज में पढ़ी। 12 साल की उम्र में करती थीं भागवत मामा ने बताया- जोधपुर में कृपाराम महाराज के आश्रम में रही। वहीं पर भागवत कथा सीखी। प्रेम बाईसा ने 12 साल की उम्र में कथा करनी शुरू कर दी थी। भागवत कथा करते थे। सात की कथा चलती है। वहीं ननो बाई का मायरा, भागवत कथा और रामकथा भी करते थे। मामा ने कहा कि पूरा परिवार सन्यासी है तब प्रेम बाइसा ने भी सन्यास लेने का प्रण ले लिया। मैंने मेरे हाथों से बड़ा किया था। जब प्रेम बाईसा की छोटी-मोटी बात होती थी। तब मेरे से शेयर करते थे। अजमेर में कथा चल रही थी उससे दौरान मेरे पास फोन आया था। कोई छोटा-मोटा काम था। उन्होंने मुझे कोई गंभीर कोई बात नहीं बताई। गाड़ी के गेट और कांच तोड़ दिए मामा ने कहा मैं जयपुर में रहता हूं बच्चे वहीं पर पढ़ते है। हैडीक्राफ्ट का जॉब करता हूं। आश्रम में वीरमनाथ अकेले थे। वहां पर एक स्टूडेंट था। कुछ लोगों ने रात में उपद्रव किया। यह मेरे को सही नहीं लगा। परिवार का कोई आदमी आ जाए तब पोस्टमार्टम के लिए लेकर जाए। वहां वीरमनाथ महाराज अकेले है। वो अकेले कहां पर लेकर जाए। हंगामा करने वाले थे। वो हंगामा करके निकल जाते हैं। भगवा को मॉर्च्युरी में रखवाना साधु संत ही निर्णय ले सकते हैं। महाराज वीरमनाथ ने कहा सुबह परिवार और साधु संत आ जाएंगे। फिर पोस्टमार्टम करवा देंगे। यह तो कराना ही था। तब लोगों ने उपद्रव किया। गाड़ी के लॉक तक तोड़ दिए। इंजेक्शन से गई थी जान मामा ने प्रेम बाइसा की मौत के इंजेक्शन से हुई है। यह तो तय है कि इंजेक्शन लगने के बाद घटना हुई है। अगर इंजेक्शन नहीं लगाते तो प्रेम बाईसा की जान बच सकती थी। बुखार से आदमी कभी जाता नहीं है। गला खराब या सांस की थोड़ी बहुत दिक्कत है तो यह घटना नहीं होती। प्रेम बाईसा का प्रण- जहां मां ने समाधि ली वहां बनाऊं आश्रम गंगाराम ने बताया- जीते जी बहुत इच्छाएं होती है लेकिन जास्ती गांव में जहां पर बहन ने समाधि ली थी। वहां पर बालाजी मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा होने वाली थी। भागवत का प्रोग्राम भी था। आश्रम भी बन रहा है। जास्ती में माताजी के नाम का आश्रम बनाना प्रेम बाईसा का प्रण था। आश्रम का काम शुरू हो गया है लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने खुद का आश्रम आरती नगर जोधपुर में बना रखा है।
पढ़ें ये खबर भी… ‘इंजेक्शन लगाने के 30-सेकंड बाद बाईसा की मौत हो गई’:पिता बोले- उसके अंतिम शब्द थे ‘मुझे न्याय दिलाना’, इसलिए 4 घंटे बाद इंस्टाग्राम पोस्ट की साध्वी प्रेम बाईसा को जैसे ही इंजेक्शन लगाया गया, 30 सेकंड में उनकी हालत बिगड़ गई। वे चीखने लगीं, सांस लेने में तकलीफ हुई और कफ निकलने लगा। गेट तक पहुंचते-पहुंचते बेहोश हो गईं और फिर दम तोड़ दिया। (पढ़ें पूरी खबर)

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