प्लॉट-मकान और जमीनों के मालिक हैं इंदौर के भिखारी:महीने की कमाई 50 से ₹60 हजार; हफ्ते के 75 हजार कमाने वाली बोली- सिलाई कर जोड़े

इंदौर शहर के कुछ भिखारी प्लॉट, मकान और जमीनों के मालिक हैं। बीते एक हफ्ते में इंदौर महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने 323 भिखारियों को पकड़कर उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजा है। इनके यहां आने पर पता चला कि कुछ की महीने की कमाई तो 50 हजार से लेकर 60 हजार रुपए तक है, किसी के पास 10 बीघा जमीन तक है। एक महिला का 500 रुपए का रोजाना खर्च ड्रग लेने का है। बता दें, इंदौर को भिक्षुक मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इतना सब होने के बाद भी किस मजबूरी या वजह में इन्हें भीख मांगकर गुजारा करना पड़ रहा है, दैनिक भास्कर ने बातचीत की, 75000 रुपए हफ्ता कमाने वाली महिला से पूछा- इतना पैसा कहां से आया? उनका जवाब था- भीख नहीं मांगती हूं, पैसा सिलाई कर जोड़ा है। खास बात यह है कि अब सभी ने आगे से भीख नहीं मांगने का संकल्प लिया है। 10 बीघा जमीन की मालकिन
इंदौर के बड़ा गणपति मंदिर के चौराहे पर भीख मांगने वाली कलाबाई गुर्जर भी सेवाधाम आश्रम में हैं। वे बताती हैं, ‘इंदौर में एयरपोर्ट कॉलोनी के पास व्यास नगर में पति लक्ष्मी नारायण गुर्जर के साथ रहती हूं। इसी कॉलोनी में एक प्लॉट भी खरीद रखा है। उज्जैन के पास उन्हेल में 10 बीघा उपजाऊ जमीन है। भीख मांगकर रोजाना 500 से 600 रुपए कमा लेती हूं। तीन बच्चे- दो बेटे और एक बेटी है।’ महीने की कमाई 45 से 60 हजार रुपए
पूनम वर्मा भी इंदौर के राजबाड़े पर भीख मांगकर रोजाना 1500 से 2500 रुपए कमाती है। पूनम ने बताया, ‘पति की मौत के बाद घरों में खाना बनाकर अपने दो बच्चों को पाल रही थी। एक दिन महू नाके के पास ट्रक के नीचे आने की वजह से मेरा एक पैर काटना पड़ा। कोई काम नहीं मिला, तो डेढ़ साल से मांगकर गुजारा शुरू कर दिया।’ पूरम ने बताया, ‘मेरा मायका उज्जैन का ही है। बच्चे इंदौर के जीवन ज्योति आश्रम में रहते हैं। मुझे उनसे मिलना है।’ इतना कहकर वो रोने लगी। 75 हजार रुपए हफ्ता कमाने वाली बोली- एक पैसा भीख का नहीं
इंदौर में भीख मांगकर खाने वालों के रेस्क्यू में सबसे ज्यादा चर्चा 72 साल की शकुंतला बाई की हुई। उनके पास 75 हजार रुपए कैश मिले थे। उन्होंने तब कहा था कि ये उनकी एक हफ्ते की कमाई है। आश्रम आकर शकुंतला का कहना है, ’75 हजार रुपए मैंने सिलाई कर जोड़े हैं। बहुत रुपए इकट्‌ठा करना है, घर बनाना है। 20 साल से पैसा जोड़ रही हूं।’ जब उनसे पूछा गया कि आप तो बोल रही थी कि 7 दिन की कमाई है? बोली, ‘नहीं, मैं भीख नहीं मांगती। 40 साल से सिलाई का काम कर रही हूं। मैं काम करने जा रही थी। पुलिस मुझे पकड़कर ले आई।’ उनसे फिर पूछा गया कि आपके पास तो 10, 20, 5 रुपए के नोट/कलदार मिले हैं, पैसा आप शरीर में क्यों बांधी थी, बैंक में क्यों नहीं जमा कराए? इस पर कहा, ‘एक पैसा भी भीख का नहीं है। बैंक वाले 2 साल से पैसे नहीं ले रहे।’ उन्होंने बताया, ‘घर में अकेली रहती हूं। दो लड़के बाहर रहते हैं।’ भीख नहीं मांगने की शपथ
सेवाधाम आश्रम के सुधीर भाई गोयल ने बताया कि इंदौर से 126 पुरुष, 163 महिलाएं और 64 बच्चों को आश्रम भेजा गया है। जब ये यहां आए, तो गंदे कपड़े पहने हुए थे। हमने इनके कपड़ों के साथ खाने-पीने की व्यवस्था की। सभी को भीख नहीं मांगने की शपथ दिलाई है। उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह ने सभी को बॉन्ड भरवाने के बाद छोड़ने के बात कही है।

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