जमीन पर आपत्ति के बाद से लेट-लतीफी में फंसा मोनोपोल प्रोजेक्ट इस बार रेलवे और खुद बिजली कंपनी की प्रक्रियाओं में उलझ गया है। दरअसल, फूलबाग पर तैयार हो रहे जीआईएस ( गैस इंसुलेटेड स्विच गियर) सब स्टेशन तक आने वाली 132 केवी की मोनोपोल लाइन का काम बिजली कंपनी से शटडाउन और रेलवे से मेगा ब्लॉक न मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा। ये काम दिसंबर तक पूरा होना था, लेकिन इन अड़चनों के कारण अब ये काम फरवरी अंत तक ही पूरा हो सकेगा। वह भी तब, जबकि रेलवे और बिजली कंपनी द्वारा बिना समय बिताए अपने हिस्से का काम कर दिया जाए। अन्यथा शहर की विधुत वितरण व्यवस्था से जुड़े इस अहम प्रोजेक्ट को पूरा होने में और भी अधिक समय लग सकता है। कुछ परेशानियों के कारण काम लंबित होता चला गया है मोनोपोल का काम पूरा कर सब स्टेशन दिसंबर में शुरू तो किया जाना था। लेकिन कुछ परेशानियों के कारण ये काम लंबित होता चला गया है। रेलवे और विद्युत वितरण कंपनी के स्तर पर कुछ काम होना है, वह जल्दी हो जाएगा तो फरवरी तक इस सब स्टेशन से शहर में सप्लाई शुरू हो जाएगी। -शशिकांत ओझा, पीआरओ/ ट्रांसमिशन कंपनी अब ये 2 कारण, जिनसे प्रोजेक्ट में देरी सब स्टेशन शुरू होने पर ओवरलोड, फॉल्ट ट्रेसिंग में बड़ा फायदा फूलबाग पर बन रहे सब स्टेशन के शुरू होने पर शहरी क्षेत्र में होने वाली ओवरलोड की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकेगी। इस ओवरलोडिंग के कारण फॉल्ट भी अधिक होते हैं। ये सब स्टेशन वोल्टेज की समस्या का भी समाधान देगा। मौजूदा सप्लाई सिस्टम में शहर के बाहरी हिस्से से बिजली सप्लाई ली जाती है। जिस कारण सप्लाई क्वालिटी बेहतर नहीं है। मौजूदा वितरण सिस्टम में यदि कोई बड़ा फॉल्ट हो जाता है तो करीब 12-15 किलोमीटर लंबी लाइनों में फॉल्ट सर्च करना होता है। क्योंकि शहर में बिजली सप्लाई देने वाले सभी सब स्टेशन शहर के सीमांत क्षेत्र में हैं। जीआईएस सब स्टेशन तैयार होने के बाद यह दूरी 2 से 5 किलोमीटर में सिमट जाएगी और फॉल्ट को जल्दी ढूढ़ा जा सकेगा।


