प्रदेश में उच्च शिक्षा में माफियाराज कायम है। राजनीतिक रसूख के दम पर मान्यता और संबद्धता पाने वाले ये कॉलेज खाली बिल्डिंगों में तब्दील हो चुके हैं। शुक्रवार को प्रशासन की 8 टीमें इनकी जांच के लिए निकलीं। इनमें 4 टीमों के साथ भास्कर के 4 रिपोर्टर भी चले। जिन्होंने मौके पर न सिर्फ टीम की कार्रवाई देखी बल्कि खुद भी इन कॉलेजों की हालत का जायजा लिया जहां न शिक्षक थे न छात्र। शिवशक्ति कॉलेज, झुंडपुरा का फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन के निर्देश पर प्रदेशभर के निजी कॉलेजों की जांच शुरू हो चुकी है। इसी तारतम्य में शुक्रवार को ग्वालियर जिले के 137 कॉलेजों में से पहले दिन 37 कॉलेजों की जांच हुई। ये जांच 8 टीम ने मिलकर किया। इन 37 कॉलेजों में से 22 कॉलेज ऐसे मिले हैं, जिनमें शैक्षणिक स्टाफ यानी प्राचार्य व शिक्षक नहीं मिले। छात्र भी गायब थे। कॉलेजों की बिल्डिंग तो मिली लेकिन शैक्षणिक स्टॉफ के न होने व छात्रों के क्लास में न आने का फर्जीवाड़ा उजागर होने से जीवाजी यूनिवर्सिटी के अफसर कटघरे में खड़े हो गए हैं, क्योंकि जेयू के अफसर दावा करते हैं कि वे नियमों का पालन करने वाले कॉलेजों को ही मान्यता जारी कर रहे हैं। इससे हर साल जारी की जाने वाली संबद्धता सवालों के घेरे में है। कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल के साथ दैनिक भास्कर की टीम भी मौजूद रही। जिसकी ग्राउंड रिपोर्ट की जिसमें यह खुलासा हुआ कि कई कॉलेज ऐसे थे जिनमें बिल्डिंग के सिवाय कुछ नहीं था। एसीएस बोले- जांच रिपोर्ट मिलने पर गड़बड़ी वाले कॉलेजों पर कार्रवाई होगी कुलैथः कॉलेज में चल रही थी पुताई, न प्रिंसिपल थे न शिक्षक, छात्र भी गायब कुलैथ में खेतों में 5 बीएड कॉलेज 100 मीटर के दायरे में बने हैं। यह सभी कॉलेज अलग- अलग संचालकों के बताए जा रहे हैं। कॉलेज तक पहुंचने के लिए सड़क भी ठीक नहीं थी। जांच टीम फिरदौस कॉलेज ऑफ एजुकेशन में पहुंची। इस कॉलेज की बिल्डिंग में किसी भी कमरे में फर्नीचर नहीं था। मजदूर कॉलेज में रंगाई-पुताई कर रहे थे। यहां जांच दल को विजय कुमार मिले। जिनका कहना था कि वह कॉलेज के संचालक हैं। कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षक व छात्रों के बारे में जांच दल ने पूछा तो कोई जानकारी नहीं दे सके। जांच दल में राजस्व निरीक्षण महेश ओझा व नगर निगम में जोनल अफसर अजय शर्मा शामिल थे। खुरैरीः कैंपस में 3 कॉलेज, संचालक को ही नहीं पता कि प्राचार्य कौन है खुरैरी में एक परिसर में 3 कॉलेज चल रहे हैं। ये कॉलेज भगवती इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, ब्रिलियंट इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज और पृथवी लॉ कॉलेज हैं। एसडीएम अशोक सिंह चौहान टीम के साथ जब यहां पहुंचे तो उन्हें एक भी छात्र और एक भी टीचिंग स्टाफ नहीं मिला। यहां तक कि एसडीएम चौहान ने भंवर सिंह किरार शिक्षा प्रसार समिति (कॉलेजों का संचालन करने वाली समिति) के सचिव एवं कॉलेज संचालक प्रशांत सिंह किरार से स्टूडेंट और स्टाफ को लेकर सवाल किए तो वे घुमा फिरा कर जवाब देते रहे। यहां तक कि खुद के कॉलेज के प्राचार्य का नाम तक वे नहीं बता पाए। बड़ागांवः स्टाफ नाश्ता लेकर आया तो एसडीएम बोले- छात्र व स्टाफ बताओ बड़ागांव में स्थित आदर्श कॉलेज ऑफ एजुकेशन एसडीएम व जांच दल के अन्य सदस्यों ने पहुंचकर जब पूछताछ शुरू की तो स्टाफ नाश्ता ले आया। जिस पर वे बोले- ये नहीं, स्टूडेंट्स और स्टाफ की जानकारी लाओ। जिस पर प्रेम सिंह राजपूत ने विंटर वैकेशन का बहाना सुनाया तो चौहान ने रिकॉर्ड मांगा, लेकिन राजपूत और स्टाफ के दूसरे लोग कोई रिकॉर्ड नहीं दे पाए। साथ ही प्राचार्य के बारे में भी नहीं बता सके, इस कॉलेज में बीएड व डीएड के लिए 150 स्टूडेंट्स का एडमिशन और प्राचार्य समेत 16 लोगों का टीचिंग स्टाफ कागजों में दर्शाया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी निजी कॉलेजों की अभी जांच करवाई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। – अनुपम राजन, एसीएस, उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश


