भास्कर न्यूज | धमतरी धान फसल की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल के अवशेष को किसान अब जलाने लगे हैं। दूसरी फसल लगाने के लिए अधिकांश किसान इसे जला देते हैं, जबकि पराली जलाने पर जिले में प्रतिबंध लगाया है। इस पर जुर्माने का भी प्रावधान है। एक एकड़ पर 2500 और 5 एकड़ से अधिक रकबे में फसल अवशेष जलाने पर 15 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद किसान पराली जला रहे हैं। इधर कृषि विभाग ने पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। बावजूद किसान पराली जला देते हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा लगातार निरीक्षण व जागरूक अभियान नहीं चलाने के चलते किसान पराली जला देते हैं। पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई भी नहीं की जाती। कृषि विभाग ने किसानों से फसल अवशेष जलाने नहीं कहा है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेष जलाना पर्यावरण, मिट्टी की उर्वरता और जनस्वास्थ्य सभी के लिए हानिकारक है। सरकार किसानों को अवशेष प्रबंधन के लिए सभी तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रही है। किसान कृपया अवशेष न जलाएं और आधुनिक, पर्यावरण हितैषी तरीकों को अपनाकर सतत कृषि की दिशा में योगदान दें। उप संचालक कृषि मोनेश साहू ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से निकलने वाले धुएं में मौजूद जहरीली गैसें मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि वायु प्रदूषण भी चिंताजनक स्तर तक बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि धान के पुआल या अन्य फसल अवशेष जलाने से ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ाने वाली गैसे कृमीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड तथा अन्य हानिकारक प्रदूषक बड़ी मात्रा में उत्सर्जित होते हैं। रकबा जुर्माना 0.80 हेक्टेयर तक 2500 0.80 से 2.02 हेक्टेयर 5000 2.02 हेक्टेयर से अधिक 15000 {अवशेष जलाने से मिट्टी की ऊपरी 15 सेंटीमीटर सतह पर मौजूद लाभदायक सूक्ष्मजीव पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं {खेतों के मित्र कीट केंचुए और मकड़ियां खत्म हो जाती हैं, जिससे प्राकृतिक कीट नियंत्रण बाधित होता है {एक टन धान के पैरा जलाने से 5.5 किग्रा नाइट्रोजन, 2.3 किग्रा फास्फोरस, 25 किग्रा पोटाश और 1.2 किग्रा सल्फर नष्ट हो जाते हैं


