राजधानी के 800 युवा सेना भर्ती की ट्रेनिंग ले रहे हैं। इन युवाओं को ट्रेंड करने इंडियन ऑर्मी और इंडियन नेवी के 10 सैनिकों ने पिछले दो साल से अभियान छेड़ रखा है। उनकी जिद है कि जैसे वो खुद रिटायर हुए हैं उसी तरह उनके बदले मां भारती की रक्षा के लिए 100 और वीर सपूत तैयार कर सकें। इसी उद्देश्य के साथ रायपुर के पुलिस लाइन में युवाओं को तो तैयार कर ही रहे हैं, साथ ही बालौद के गुरुर में भी गांव के युवाओं में देशप्रेम की अलख जगा रहे हैं। खास बात ये है कि ये दसों भूतपूर्व सैनिक फिलहाल बैंकिंग के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद भी समय निकालकर 800 से अधिक युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं। इन सभी ने आपस में इस तरह समय का प्रबंधन किया है कि एक दिन पहले पांच सैनिक सेवा देते हैं तो दूसरे दिन बाकी के पांच। रायपुर और बालौद में दोनों जगह एक-एक दिन के अंतराल में इन पांच भूतपूर्व सैनिकों की टीम पहुंचती है। न्यूनतम 15 साल की उम्र से सेना में भर्ती की उम्र तक पूरी तरह निशुल्क ट्रेनिंग दी जा रही है। लक्ष्य तय कराने से लेकर सेना में पहुंचाने तक का उठाया जिम्मा
इंडियन नेवी से सेवानिवृत्त पेटी ऑफिसर अजय कुमार सिंह बताते हैं कि अधिकतर बच्चों को सही समय पर ये पता नहीं होता कि कैसे सेना में जाना है? जानकारी नहीं होने की वजह से समय निकल जाता है। इसलिए हमने पहल की है कि शहर से लेकर गांव तक के स्कूलों में जाएंगे और बच्चों को सेना के बारे में जानकारी देकर उन्हें लक्ष्य तय करने में मदद करेंगे। सिंह बताते हैं कि बच्चा तय कर ले तो इसके बाद हम उसे सेना में भर्ती कराने का जिम्मा उठाते हैं। पिछले दो साल में अब तक 70 युवा सेना में भर्ती हो चुके हैं।
दुश्मन देशों से मुठभेड़ के अनुभव बता भर रहे जोश
मुंबई में हुए 26-11 के आतंकी हमलों में अजय सिंह आईएनएस आंग्रे में तैनात थे, उन्होंने दुश्मनों से निपटने हथियार व गोला-बारूद सप्लाई करने में भूमिका निभाई। पेटी ऑफिसर रूद्र पांडे ने सोमालिया में समुद्री डाकुओं से मर्चेंट शिप को बचाने में शौर्य दिखाया। वहीं इंडियन आर्मी के चोवेंद्र साहू ने 2012-13 में लद्दाख में पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर करने में जान की बाजी लगाई। इंडियन नेवी के राकेश रॉय ने 2004 में श्रीलंका में आई सुनामी में सेवा दी। ये सभी अपने प्रमुख ऑपरेशन के अनुभव बताकर युवाओं में जज्बा भर रहे हैं। फिजिकल ट्रेनिंग के साथ लिखित परीक्षा की भी तैयारी
ये भूतपूर्व सैनिक युवाओं को शारीरिक रूप से तो तैयार कर ही रहे हैं। साथ ही उन्हें लिखित परीक्षा की भी तैयारी करा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने खुद ही एक शिक्षक की नियुक्ति की है। वहीं मैदान में हाई जंप, लो-जंप, गोला फेंक, रनिंग, पुश-अप, शिट-अप, उठक-बैठक, बैलेंसिंग, बीम मारने का अभ्यास कराया जा रहा है। इसके अलावा हफ्ते में एक दिन 10 किलोमीटर की दौड़ भी कराई जाती है।


