फीडर पर काम करते वक्त श्रमिक की मौत हुई थी आदेश, बीमा कंपनी करे 7.40 लाख रु. का भुगतान

करौली| जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक विद्युत श्रमिक की विद्युत फीडर पर मरम्मत कार्य के दौरान करंट लगने से हुई मौत के मामले में एक बीमा कम्पनी की ओर से मृतक की पत्नी को प्रतिकर क्लेम राशि का भुगतान नहीं करने को बीमा कंपनी का सेवा दोष माना है। आयोग ने पीड़िता को 20 हजार रुपए मानसिक संताप तथा परिवाद व्यय के अलावा 7 लाख 40 हजार रुपए की प्रतिकर राशि का ब्याज सहित भुगतान करने के आदेश दिए हैं। प्रकरण के अनुसार परीता गांव का निवासी सूरजसिंह एक विद्युत सेवा प्रदाता फर्म में श्रमिक के रूप में सेवारत था। फर्म की ओर से सूरज सहित अन्य श्रमिकों का भी श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 164 श्रमिकों का ग्रुप बीमा कराया हुआ था। परीता गांव में विद्युत फीडर पर मरम्मत कार्य करते हुए सूरज की करंट लगने से 6 अक्टूबर 21 को मृत्यु हो गई। सूरज की मृत्यु के बाद पत्नी महेंद्र बाई ने बीमा कंपनी से मृत्यु क्लेम राशि के भुगतान की मांग की। लेकिन बीमा कम्पनी ने समय पर श्रमिक की मौत की सूचना नहीं देने, तथा संबंधित फर्म में उसके संविदाकर्मी होने के दस्तावेज फर्म की ओर से उपलब्ध नहीं करने का कारण बताते हुए मृत्यु दावा क्लेम राशि के भुगतान से मना कर दिया। इस पर सूरजसिंह की पत्नी महेंद्र बाई ने प्रदीप जैन वकील के जरिए 27 सितंबर 22 को परिवाद उपभोक्ता आयोग के समक्ष परिवाद पेश किया था। आयोग के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह तथा सदस्य सुरेन्द्र चतुर्वेदी ने इस मामले के सभी पक्षों के तर्कों, साक्ष्य, सबूतों का विश्लेषण करने के बाद बीमा कम्पनी का सेवा दोष माना। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से इस प्रकरण को श्रम न्यायालय के क्षेत्राधिकार का मामला बताते हुए क्षेत्राधिकार के आधार पर आपत्ति जताई। इस आपत्ति को आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 100 का हवाला देते हुए खारिज किया। आयोग के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह तथा सदस्य सुरेन्द्र चतुर्वेदी ने कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के स्लैब अनुसार श्रमिक की मौत पर प्रतिकर राशि की गणना करके बीमा कम्पनी को 7 लाख 39 हजार 350 रुपए का परिवाद पेश करने की तिथि से 6 प्रतिशत ब्याज सहित 30 दिन में भुगतान करने के आदेश दिए हैं।

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