कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया के अनुसूचित जाति-जनजाति समाज को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान ने मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। एससी-एसटी वर्ग के जनप्रतिनिधियों की तुलना ‘कुत्ते जैसी स्थिति’ से करने और आदिवासियों को हिंदू न बनने की सलाह देने वाले बयान पर पंधाना से बीजेपी विधायक छाया मोरे ने विरोध दर्ज कराया है। बीजेपी विधायक छाया मोरे ने कहा कि यह केवल जुबान फिसलने का मामला नहीं है, बल्कि कांग्रेस की आदिवासी और दलित विरोधी मानसिकता का खुला प्रमाण है। एससी-एसटी समाज के विधायक और सांसद जनता के लोकतांत्रिक मत से चुनकर आते हैं और इस तरह की टिप्पणी पूरे समाज का अपमान है। छाया मोरे ने कहा देश के सर्वोच्च पद पर बीजेपी ने अनुसूचित जाति वर्ग से रामनाथ कोविंद और वर्तमान में जनजातीय समाज से द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाया। इसके अलावा मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी आदिवासी समाज से आते हैं, ऐसा सम्मान कांग्रेस कभी नहीं दे पाई। कांग्रेस विधायक के आदिवासियों को हिंदू न बनने संबंधी बयान पर पलटवार करते हुए छाया मोरे ने कहा कि आदिवासी समाज भारत का मूल निवासी है और सदियों से भगवान राम, भगवान कृष्ण और बजरंगबली की पूजा करता आ रहा है। बोलीं- कांग्रेस विधायक सार्वजनिक रूप से माफी मांगें
बीजेपी विधायक ने कहा कि फूल सिंह बरैया अपनी ही पार्टी की विचारधारा के दबाव में आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, जो निंदनीय और शर्मनाक है। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस विधायक अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और इस बयान के लिए प्रायश्चित करें। छाया मोरे ने चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासी और दलित समाज अपने अपमान को कभी स्वीकार नहीं करेगा और कांग्रेस को इस तरह की बयान बाजी का राजनीतिक जवाब जरूर मिलेगा।


