शनिवार को साल की आखिरी लोक अदालत में सबसे सुखद लम्हे फैमिली कोर्ट में देखने को मिले। एक मामला तो ऐसा था कि दंपती में विवाद के बाद पत्नी मायके चली गई। वहां उसे बिटिया हुई। पति ने अपनी ही बेटी को कभी गले से नहीं लगाया था। फैमिली कोर्ट में मां की गोद में बच्ची थी। न्यायाधीश ने पति से पूछा कि अपनी बिटिया को कभी गोद में लिया कि नहीं? पति ने कहा कि आज तक नहीं लिया। न्यायाधीश ने पत्नी से कहा कि बिटिया को उसके पिता की गोद में दीजिए। पिता ने जैसे ही बेटी को गोद में लिया, बिटिया भी पिता से लिपट गई। पिता की आंखें छलक गईं। न्यायाधीश भी अपनी आसंदी से खड़े हुए और तालियां बजाईं। अधिवक्ता महेंद्र मौर्य के मुताबिक 2020 में दंपती की शादी हुई थी। विवाद के बाद पत्नी ने दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करवा दिया। पति ने फैमिली कोर्ट में पत्नी के साथ रहने के लिए अर्जी लगाई थी। पत्नी सोशल मीडिया पर व्यस्त रहती, इसलिए विवाद : एडवोकेट प्रणय शर्मा के मुताबिक धार रोड पर रहने वाले दंपती इसलिए अलग रह रहे थे कि पत्नी का ज्यादातर समय सोशल मीडिया पर बीत रहा था। जज की समझाइश पर पति-पत्नी फिर एक हो गए। 4341 प्रकरणों का निराकरण : इधर, जिला व सत्र न्यायालय और तहसील न्यायालयों में 4341 मामलों का निराकरण हुआ। 60 करोड़ के अवॉर्ड भी पारित किए गए। प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव ने लोक अदालत का शुभारंभ किया। निगम : 40 करोड़ का राजस्व जमा : लोक अदालत में निगम ने 30 करोड़ की वसूली का टारगेट रखा था। देर रात तक 40 करोड़ का राजस्व जमा हुआ। दोपहर में महापौर पुष्यमित्र भार्गव और राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान विभिन्न जोन पर निरीक्षण करने पहुंचे। टैक्स जमा करने की समझाइश दी।


