ऊंट उत्सव भले ही कैलेंडर के पन्नों से गुजर गया हो, लेकिन उसकी रंगीन छवियां, लोक संस्कृति की खुशबू और मरुस्थल की आत्मा आज भी देशी-विदेशी सैलानियों के दिलो-दिमाग में जीवंत है। फ्रांस के वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट जीन-यवेस डेसफॉक्स के लिए बीकानेर का ऊंट उत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बन गया। ऊंटों और उनके मालिकों के बीच दिखे अपनत्व ने उन्हें अपने देश फ्रांस के घोड़ा महोत्सव की याद दिला दी, जहां परंपरा, पशु और इंसान का रिश्ता सदियों से जीवित है। फ्रांस के नॉरमैंडी क्षेत्र में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार और फोटो जर्नलिस्ट जीन-यवेस डेसफॉक्स ने बीकानेर में आयोजित ऊंट उत्सव के दौरान खींची गई तस्वीरों और अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से पत्रकारिता और 35 वर्षों से फ्रांस के सबसे बड़े अखबार ऑएस्ट-फ्रांस के लिए काम कर चुके हैं। डेसफॉक्स के अनुसार, नॉरमैंडी में उनके घर के पास लेसे (मांचे) क्षेत्र में सेंट क्रॉइक्स मेला लगता है, जो हजारों वर्षों से भी अधिक पुराना घोड़ा महोत्सव है। यह मेला और बीकानेर का ऊंट उत्सव, भले ही दो अलग-अलग देशों में आयोजित होते हों, लेकिन इन दोनों में परंपरा, जनभावना और पशुओं के प्रति सम्मान एक-सा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जैसे राजस्थान में ऊंट रोजमर्रा के जीवन, खेती और परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वैसे ही फ्रांस में घोड़ा ग्रामीण जीवन की आत्मा रहा है। दोनों ही त्योहारों में लोगों का अपने पशुओं के प्रति गहरा लगाव और सम्मान साफ झलकता है। डेसफॉक्स ने बीकानेर के स्थानीय गाइड शैलेंद्र कच्छावा और पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे फ्रांस लौटकर बीकानेर ऊंट उत्सव और फ्रांस के घोड़ा महोत्सव की संयुक्त फोटो प्रदर्शनी लगाएंगे। इसके अलावा, एक फोटोग्राफी बुक प्रकाशित की जाएगी और फ्रांस के विभिन्न टूरिस्ट गाइड्स को बीकानेर ऊंट उत्सव की तस्वीरें भेजी जाएंगी। फ्रांसीसी छायाकार के दिल में बस गया लोगों का ऊंटों से प्रेम, फ्रांस के घोड़ा महोत्सव का किया जिक्र बीकानेर का ऊंट उत्सव और फ्रांस का घोड़ा मेला दिखाते हैं कि सभ्यताएं भले अलग हों, लेकिन परंपराओं की आत्मा एक-सी होती है। दोनों ही जगह पशु केवल साधन नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा हैं। इन उत्सवों के जरिए आने वाली पीढ़ियों तक लोकसंस्कृति, सम्मान और सहअस्तित्व का संदेश पहुंचता है। यही कारण है कि ये महोत्सव केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक आकर्षण बनते जा रहे हैं।


