टस्कर ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का फ्रेंचाइजी दिलाने और लाखों रुपये मुनाफे का झांसा देकर दुर्ग के व्यापारी के साथ करीब 26 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित राहुल परिहार ने टस्कर ग्लोबल प्रायवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, मार्केटिंग हेड और सेल्स इंचार्ज पर धोखाधड़ी, छल-कपट और झूठे वादों के जरिए गाढ़ी कमाई हड़पने का आरोप लगाया है। व्यापारी की शिकायत के आधार पर मोहन नगर थाना में तीनों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है। पीड़ित राहुल परिहार के अनुसार टस्कार ग्लोबल प्रायवेट लिमिटेड के डायरेक्टर उत्कर्ष कश्यप, मार्केटिंग हेड आलोक/अनमोल दुबे एवं सेल्स इंचार्ज प्रणीता ने उन्हें कंपनी की मेडिकल फ्रेंचाइजी लेने के लिए संपर्क किया था। आरोप है कि कंपनी के प्रतिनिधियों ने फ्रेंचाइजी लेने पर हर माह 1 से 2 लाख रुपये तक मुनाफा होने का दावा किया। इसके साथ ही दुकान का इंटीरियर, ब्रांड प्रमोशन, एमबीबीएस डॉक्टर के साथ ओपीडी सुविधा, पैथोलॉजी, दवाइयों का स्टॉक, कर्मचारियों की व्यवस्था और उनके वेतन तक का खर्च कंपनी द्वारा उठाने का भरोसा दिया गया। 3 लाख रुपए से ज्यादा फ्रेंचाइजी फीस भरा
वादों के झांसे में आकर राहुल परिहार ने 27 अक्टूबर 2024 को कंपनी की फ्रेंचाइजी ले ली। इसके बाद कंपनी ने अलग-अलग मदों में उनसे भारी रकम वसूली। फ्रेंचाइजी फीस के नाम पर 3.80 लाख रुपये, इंटीरियर के लिए 3.50 लाख रुपये, मार्केटिंग के लिए 2.50 लाख रुपये, दवाइयों के स्टॉक के नाम पर 10 लाख रुपये और एमबीबीएस डॉक्टर व पैथोलॉजी सुविधा के लिए 5 लाख रुपये लिए गए। इस तरह 28 अक्टूबर 2024 से 23 दिसंबर 2024 के बीच फोन-पे, आरटीजीएस सहित अन्य माध्यमों से कुल 25 लाख 93 हजार 400 रुपये कंपनी को दिए गए। अनुपयोगी और गलत दवाएं भेजी
प्रार्थी ने बताया कि रकम लेने के बाद कंपनी ने न तो तय सुविधाएं उपलब्ध कराईं और न ही अपने वादों को पूरा किया। पीड़ित का कहना है कि बार-बार ईमेल करने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई गई दवाइयों में कई दवाएं अनुपयोगी और गलत भेज दी। इसी दौरान छत्तीसगढ़ शासन के औषधि एवं प्रसाधन सामग्री विभाग ने दुकान पर नोटिस जारी किया, जिसमें प्रतिबंधित दवाइयों की बिक्री का आरोप लगाया गया। औषधि विभाग ने सील किया मेडिकल
पीड़ित ने बताया कि इस संबंध में भी कंपनी को ईमेल और फोन के जरिए जानकारी दी गई, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अंततः शासन के औषधि विभाग ने दुकान को सील कर दिया, जिससे पीड़ित को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। 3 जुलाई 2025 को जब राहुल परिहार ने कंपनी के डायरेक्टर और मार्केटिंग हेड से फोन पर बात कर समाधान की मांग की तो उन्हें टाल दिया गया और बाद में उनका नंबर भी ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित ने मोहन नगर थाने में शिकायत की, जिसके आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।


