शेर, बाघ, बघेरा, दरियाई घोड़ा, हिरण, शुतुरमुर्ग, मरगमच्छ, हाथी सहित अन्य वन्यजीवों को आमजन अब गोद ले सकेंगे। इसके लिए डीएफओ के पास आवेदन करना होगा। गोद लेने वालों को इन वन्यजीवों के रखरखाव, खान-पान आदि का खर्च उठाना होगा। ये वन्य जीव कैप्टिव एनिमल स्पॉन्सरशिप स्कीम (बंदी पशु प्रयोजन योजना) के तहत दिए जाएंगे। यह योजना राजस्थान के जू और जैविक उद्यानों में दुर्लभ व संकटग्रस्त भेड़िया, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, लेसर फ्लोरिन जैसे जीवों की देखभाल और संरक्षण के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत वन्यजीव प्रेमी चिड़ियाघर, बॉयोलॉजिकल पार्क में रहने वाले जानवरों को गोद ले सकते हैं। प्रदेश के सभी बायोलॉजिकल पार्क से योजना को शुरू किया गया। जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 26 प्रजातियों के करीब 250 से ज्यादा वन्य जीवों को गोद ले सकते हैं। डीएफओ के पास करना होगा आवेदन; रहने, खाने, दवा का खर्च उठा सकेंगे
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रहने वाले सभी वन्य जीवों में से सबसे ज्यादा खर्च दरियाई घोड़े पर आता है। उस पर 1 दिन में 1500 रुपए तक खर्च होते हैं। शेर, बाघ, बघेरे के भोजन पर प्रतिदिन औसतन 1200 रुपए खर्च आता है। भेड़िया पर 500 तक का खर्च आएगा। कोई व्यक्ति जानवरों के रहने की, दवा की व्यवस्था, भोजन की, रखरखाव की व्यवस्था भी अलग-अलग कर सकता है। 1 माह से लेकर 1 साल तक ले सकेंगे गोद
वन्य जीव को कम से कम 1 माह और अधिकतम 1 साल तक के लिए गोद ले सकते हैं। अगर सब कुछ ठीक रहता है तो 5 साल तक के लिए भी गोद ले सकते हैं। इसके लिए वन्य जीव पर आने वाले 1 दिन के खर्चे को जोड़कर पूरे महीने का हिसाब निकालने के बाद व्यक्ति से डीडी लिया जाएगा। इसके बदले में गोद लेने वाले व्यक्ति के परिवार और उसके परिचितों को बिना किसी खर्च के बायोलॉजिकल पार्क और सफारी में छूट भी मिलेगी। “इस योजना से आमजन को जोड़ा जा रहा है। इससे ना केवल वन्य जीव प्रेमियों को सीधे तौर पर वन्यजीव से जुड़ने का मौका मिलेगा, साथ ही उसके जीवन के उतार चढ़ाव को भी वह करीब से देख पाएंगे। अपने पसंदीदा वन्य जीव को पालने का भी सपना पूरा हो सकेगा।”
-देवेंद्र सिंह, एसीएफओ नाहरगढ़ जैविक उद्यान


