राजस्थान के नागौर के जवान पश्चिम बंगाल में शहीद हो गए। धाराराम पश्चिम बंगाल के रानी नगर(मुर्शिदाबाद) बीएसएफ की 156 बीएन बटालियन में हेड कॉन्स्टेबल थे। तीन महीने बाद ही वे वीआरएस लेने वाले थे। शनिवार की सुबह पार्थिव देह पैतृक गांव पहुंची, जहां सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया। जवान को डॉक्टर बेटे ने मुखाग्नि दी। बीएसएफ इंस्पेक्टर रमेश कुमार ने बताया- नागौर के पुंदलू गांव निवासी धाराराम कमेड़िया (45) से गुरुवार रात 8 बजे वैपन डिपॉजिट करवाते समय गलती से गोली चल गई, जो उनकी आंख पर लगी। इसके बाद रानी नगर के सीएच हॉस्पिटल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। वे पिछले 25 साल से बीएसएफ में थे। जब भी जवान अपनी ड्यूटी से वापस लौटते हैं तो वैपन को डिपॉजिट करते हैं। इस दौरान उन्हें चेक किया जाता है। धाराराम के बेटे मनीष ने बताया- साल 2000 में पिता ने बीएसएफ को जॉइन किया था। 11 नवंबर को पिता की यूनिट पश्चिम बंगाल के रानी नगर में त्रिपुरा से आई थी। वे तीन महीने बाद वीआरएस लेने वाले थे। वे जब भी गांव आते थे, तो युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। एम्स में डॉक्टर है बेटा
ग्रामीणों ने बताया- धाराराम के एक बेटा और एक बेटी है। बेटा मनीष (23) राजकोट एम्स में डॉक्टर है। वहीं बेटी प्रियंका (18) पढ़ाई कर रही है। शहीद से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जन्मदिन के दिन शहीद हुए जवान हरिकृष्ण:6 साल से जाट रेजिमेंट में थे तैनात, 12 दिन पहले छुट्टी पूरी कर पहुंचे थे लेह लेह में ड्यूटी के दौरान हनुमानगढ़ के जवान शहीद हो गए। जवान हरिकृष्ण का शुक्रवार को 25वां जन्मदिन था।12 दिन पहले ही छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर लेह पहुंचे थे। पढ़ें पूरी खबर


