रांची पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 12 बच्चों को बरामद किया है। इसके साथ ही 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। बच्चा चोरी मामले में रांची पुलिस की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। गुलगुलिया गिरोह के नाम से प्रचलित यह गिरोह पिछले 10 साल से झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सक्रिय था। रांची के मौसीबाड़ी से चोरी हुए अंश-अंशिका की तलाश के दौरान पुलिस इस गिरोह तक पहुंची। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के दो सदस्य नव खेरवार और उसकी प|ी सोनी कुमारी को गिरफ्तार किया था। ये दोनों पुलिस रिमांड पर है। इनसे पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने इन बच्चों को बरामद किया, जो अलग-अलग जगहों से चुराए गए थे। गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि बच्चा चुराने के बाद उन्हें अलग-अलग जगहों पर बेच देते थे। इन बच्चों से पॉकेटमारी, चोरी और भीख मंगवाने का काम किया जाता था। बड़ी होने के बाद बच्चियों को देह व्यापार में धकेल देता था। इस गिरोह ने अंश-अंशिका को बेचने की भी तैयारी कर ली थी, लेकिन मीडिया में लगातार खबर आने और पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण बेचने से पहले ही उनकी गिरफ्तारी हो गई। रांची एसएसपी राकेश रंजन ने कहा कि पुलिस ने इनसे एक कार भी जब्त की है। सरगना विरोधी सहित गिरोह के इन सदस्यों की गिरफ्तारी आगे क्या : माता-पिता की तलाश शुरू, डीएनए जांच करा सकती है पुलिस जिन बच्चों को पुलिस ने बरामद किया है, वे 4 से 12 साल के हैं। रांची पुलिस ने फिलहाल उन्हें अपने पास रखा है। इनके माता-पिता की तलाश शुरू कर दी है। इसके लिए रांची पुलिस की सीआईडी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) और केंद्र सरकार की वात्सल्य वेबसाइट की मदद ली जा रही है। माता-पिता के सामने आने के बाद पहचान के लिए पुलिस डीएनए जांच भी करा सकती है, ताकि बच्चे असली अभिभावक को सौंपे जा सके। 4-6 साल के बच्चे टार्गेट पर, क्योंकि वे पहचान भूल जाते हैं यह गिरोह छोटे-छोटे बच्चों को चुराता था। गरीब और चार से छह साल तक के बच्चे इनके निशाने पर रहते थे। क्योंकि ये बच्चे कुछ दिन बाद भूल जाते थे कि उनके माता-पिता कौन हैं। यही नहीं, आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि होने के कारण बच्चों के अभिभावक पुलिस के पास जाने से कतराते थे। पुलिस पर उन्हें खोजने का दबाव नहीं बना पाते थे। इसी का फायदा यह गिरोह उठाता था। फिर कुछ दिन बाद बच्चों को बेच देते थे। इस गिरोह में महिलाएं भी थीं, जो चोरी के बच्चों को अपने साथ रखती थीं, ताकि कोई शक न करे। रांची, रामगढ़, लातेहार और लोहरदगा से चुराए गए थे ये बच्चे जिन बच्चों को बरामद किया गया है, वे रांची के सिल्ली, रामगढ़ के कोठार, लातेहार के बारियातू, धनबाद और लोहरदगा से चुराए गए थे। इनमें से दो बच्चों को दो साल पहले रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड से और एक बच्ची को तीन साल पहले संबलपुर रेलवे स्टेशन से चुराया था। वहीं तीन साल पहले पांच बच्चियों को लातेहार के बारियातू से, दो बच्चियों को धनबाद, एक बच्ची को लोहरदगा व एक को रांची के जगन्नाथपुर से चुराया था। बच्चों से पॉकेटमारी-चोरी भी करवाते थे, बड़ी होने पर बच्चियों को देह व्यापार में धकेल देते थे, अंश-अंशिका को भी बेचने की तैयारी थी, इससे पहले पकड़े गए विरोधी खेरवार


