बच्चों के विकास, प्रेग्नेंसी व बुजुर्गों के दिल पर भारी पड़ रहा थायरॉइड

भास्कर एक्सपर्ट थायरॉइड को अक्सर केवल वजन बढ़ने या घटने से जोड़ा जाता है, लेकिन यह एक हार्मोनल विकार है जो उम्र और लिंग के अनुसार अलग-अलग लक्षण दिखाता है। इसके लक्षण अक्सर थकान, तनाव या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। थायरॉयड का कम सक्रिय होना (हाइपो) या अधिक सक्रिय होना (हाइपर) बच्चों, महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों में अलग तरीके से प्रभावित कर रहा है। बच्चों में हार्मोन की कमी से शारीरिक और मानसिक विकास में देरी संभव है, अक्सर इसका कारण हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस होता है। महिलाओं में हल्की गड़बड़ी भी गर्भधारण में बाधा डालती है, इसलिए प्रेग्नेंसी से पहले और दौरान नियंत्रण जरूरी है। पुरुषों में हाइपरथायरॉयडिज्म घबराहट और दिल की धड़कन तेज कर सकता है। बुजुर्गों में सुस्ती, अवसाद और दिल की अनियमितता लक्षण हो सकते हैं। शहर में महीने में एक विशेषज्ञ के पास ही 30 से 40 केस रिपोर्ट हो रहे हैं। सही समय पर जांच, इलाज जरूरी मोटापा, बैठकर काम करने की आदत, बढ़ता तनाव-बिगड़ी लाइफस्टाइल भी थायरॉइड को कंट्रोल करने वाले ब्रेन सिग्नल्स को प्रभावित करते हैं। डाइटिंग पर भी वजन बढ़ना, अच्छी भूख के बावजूद वजन कम होना, तो थायरॉयड जांच जरूरी है। 8 घंटे से अधिक नींद के बाद भी लगातार थकान रहना, तापमान के प्रति असामान्य संवेदनशीलता ज्यादा ठंड लगना या ठंड में भी पसीना आना संकेत हो सकते हैं। गर्दन में सूजन, गले में जकड़न, आवाज बैठना, मूड में बदलाव, घबराहट, तेज धड़कन, ब्रेन फॉग, अवसाद, त्वचा का रूखापन और भौंहों के बाल पतले होना भी जांच की आवश्यकता दर्शाते हैं। समय पर पहचान और सही इलाज से थायरॉइड पूरी तरह कंट्रोल में रह सकता है। डॉ प्रेरणा गोयल, सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन केस 1: पढ़ाई में गिरावट और ग्रोथ रुकी : 7 साल के बच्चे की पढ़ाई में अचानक कमी आई। लंबा होना रुक गया, वजन बढ़ गया और बच्चा हर समय ठंड लगने व कब्ज की शिकायत करने लगा। शुरुआत में माता-पिता ने इसे पढ़ाई का दबाव समझा, लेकिन जांच में पता चला कि बच्चे में थायरॉइड हार्मोन की कमी है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों में ज्यादातर मामलों में इसकी वजह ऑटोइम्यून बीमारी हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस होती है। केस 2: मां बनने की चाह में अड़चन: 28 साल की महिला पिछले डेढ़ साल से गर्भधारण में असफल रही। पीरियड्स अनियमित और ज्यादा ब्लीडिंग वाले थे। थायरॉइड प्रोफाइल में हल्का सा हार्मोनल असंतुलन सामने आया। डॉक्टरों का कहना है कि रिप्रोडक्टिव एज की महिलाओं में थायरॉइड का हल्का सा गड़बड़ होना भी फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। प्रेग्नेंसी से पहले और दौरान थायरॉइड का नियंत्रण बेहद जरूरी होता है। केस 3: अचानक वजन घटा : 22 साल के युवक का वजन तेजी से घटने लगा, जबकि भूख पहले जैसी ही थी। दिल की धड़कन तेज, हाथों में कंपन, घबराहट और आंखों का बाहर की ओर उभरना जैसी शिकायतें बढ़ती गईं। जांच में उसे हाइपरथायरॉइडिज्म निकला। ज्यादा थायरॉइड हार्मोन नर्वस एक्टिविटी बढ़ाता है, लक्षण पुरुषों में तेजी से बढ़ रहा है। केस 4: बुजुर्ग में हार्ट रिदम बिगड़ी : 78 वर्षीय महिला को इमरजेंसी लाया गया। पहले हार्ट अटैक की आशंका थी, जांच में थायरॉइड की गड़बड़ी मिली। बुजुर्गों में थायरॉइड नई शुरुआत के रूप में हार्ट रिदम की समस्या, डिप्रेशन या अत्यधिक सुस्ती के रूप में सामने आ सकता है।

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