प्रदेश में हाई कोर्ट की ओर से 93 बजरी लीज निरस्त करने के मामले में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करेगी। खान विभाग इसकी तैयारियों में जुटा है। माना जा रहा है कि इन लीजों के बरकरार रहने और इनमें प्रोडक्शन शुरू होने के बाद प्रदेश में बजरी के दाम 30 प्रतिशत तक कम हो जाएंगे। उधर, खान विभाग को इन लीजों से सालाना 200 करोड़ रुपए तक का राजस्व और रॉयल्टी मिलने का भी अनुमान है। गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा 4 जिलों (भीलवाड़ा, बाड़मेर, टोंक और सिरोही) में नीलामी को निरस्त कर दिया था। साथ ही, लीजधारकों को जमा राशि लौटाने के भी निर्देश दिए थे। निरस्त होने का मुख्य कारण प्राकृतिक भरपाई था
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि राज्य सरकार ने ब्लॉकों की नीलामी करते समय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की सिफारिशों का पालन नहीं किया। नेचुरल रीप्लेनिशमेंट के अभाव के नियमों का उल्लंघन होना इसकी वजह बना। एक बार किसी बजरी की लीज समाप्त होने के बाद उस क्षेत्र में अगले 5 वर्ष तक खनन प्रतिबंधित होना चाहिए, ताकि नदियों में बजरी की भरपाई हो सके। सरकार ने इसका पालन नहीं किया। 3 विकल्पों में एसएलपी चुनी विभाग के पास तीन विकल्प थे—विभागीय रिव्यू, हाई कोर्ट के निर्णय की पालना और सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करना। एसएलपी पर सहमति बनी है। भास्कर एक्सपर्ट—प्रो. एसके सिंह, सीईएसी कमेटी फॉर राजस्थान के मेंबर रह चुके सरकार कोर्ट जाएगी तो उम्मीद है कि सुनवाई भी होगी। एक्सपर्ट भी योगदान देंगे तो बात बन सकती है। अब इनका आधार 2020 की सैंड पॉलिसी रह सकता है, जिसे लेकर खुद सुप्रीम कोर्ट या उससे जुड़ी कमेटी राय जाहिर कर चुकी है। “इस मामले में विभाग क्या कर रहा है। इसका खुलासा अभी नहीं करेंगे। हालांकि, विभाग नियमों में रहते हुए वर्किंग करेगा।”
-टी. रविकांत, प्रमुख सचिव, खान


