बड़ा गणपति फ्लायओवर संकट में, डिजाइन पर निगम की आपत्ति:वजह – पिलर्स के नीचे आ रही ड्रेनेज लाइन, पास से ही गैस-वाटर लाइन भी, पहले ही जगह कम

बड़ा गणपति फ्लायओवर संकट में आ गया है। ब्रिज के प्रस्तावित पिलर्स के नीचे नगर निगम की प्राइमरी ड्रेनेज लाइन आ गई है। निगम ने आईडीए को स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि इसे शिफ्ट करना संभव नहीं होगा। ब्रिज के पिलर्स की डिजाइन या लोकेशन में बदलाव कर लें। आईडीए व नगर निगम इसका समाधान ढूंढ़ने में लगे हैं। बड़ा गणपति चौराहे पर 32 करोड़ से 3 लेन फ्लायओवर का निर्माण राजमोहल्ला से सुभाष मार्ग की ओर किया जा रहा है। फ्लायओवर की डिजाइन को लेकर निगम की आपत्ति है, क्योंकि प्रस्तावित पिलर्स के नीचे 1400 मिमी (4.5 फीट) चौड़ाई की प्राइमरी ड्रेनेज लाइन है। यह पूरे ब्रिज के 700 मीटर लंबाई के मीडियन पर है। ड्रेनेज करीब 20 से 25 फीट गहराई पर है, पिलर्स की नींव के लिए इससे अधिक गहरी खुदाई होगी। ऐसे में मीडियन पिलर्स बनाने में मुश्किल आएगी। सवाल ये है कि करोड़ों का ब्रिज प्लान करने से पहले ये जानकारी क्यों नहीं ली गई। 1400 मिमी (4.5 फीट) चौड़ाई की प्राइमरी ड्रेनेज लाइन है प्रस्तावित फ्लायओवर के पिलर्स के नीचे। 32 करोड़ रुपए की लागत से तीन लेन का फ्लायओवर प्रस्तावित हैं 20-25 फीट की गहराई पर है ड्रेनेज लाइन, लेकिन पिलर्स की नींव के लिए इससे अधिक खुदाई होगी, जिससे दिक्कत होगी। शिफ्ट करने में ब्रिज की लागत जितना खर्च होगा निगम इंजीनियर्स ने आईडीए को स्पष्ट कर दिया है कि यहां से लाइन शिफ्ट करना संभव नहीं है। आसपास गैस, वाटर लाइन होने से इसके लिए जगह नहीं मिलेगी। फिर भी कोशिश की तो लाइन शिफ्ट करने में ब्रिज की लागत के बराबर खर्च हो सकता है। इसलिए डिजाइन या लोकेशन बदलना ही बेहतर होगा। विकल्प तलाश रहे अफसर
बड़ा गणपति चौराहे पर सड़क ज्यादा चौड़ी नहीं होने से थ्री लेन ब्रिज ही बना रहे हैं। ब्रिज के बाद दोनों ओर 6-6 मीटर जगह बचेगी। तकनीकी जानकारों के अनुसार, पिलर्स की नींव के स्ट्रक्चर में बदलाव करते हैं तो भी पाइप लाइन के दोनों ओर 4 से 6 फीट जगह छोड़ना होगी। बीच का स्ट्रक्चर 12 से 15 फीट का हो सकता है। इसमें खर्च भी बढ़ जाएगा। जगह कम होने से मुश्किल भी आएगी। अफसर विकल्प ढूंढ रहे हैं। आईडीए को जानकारी दे दी है
आईडीए कन्सल्टेंट के साथ चर्चा में यह मामला सामने आया है। आईडीए को जानकारी दी है, डिजाइन सुपर इंपोज करके देख रहे हैं।-शिवम वर्मा, निगमाआयुक्त ​​​​​​​तकनीकी समाधान ढूंढ रहे हैं
इस तरह की समस्या सामने आई है। इसका तकनीकी समाधान देख रहे हैं। -रामप्रकाश अहिरवार, सीईओ, आईडीए

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