रायपुर में बढ़ते वायु प्रदूषण और काले डस्ट की समस्या को लेकर कांग्रेस ने आज पर्यावरण कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। शहर जिला कांग्रेस के नेतृत्व में हुए इस विरोध में युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई और अन्य प्रकोष्ठों के पदाधिकारी भी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पर्यावरण विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है, जबकि हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।
काला डस्ट और गिरती एयर क्वालिटी बना मुद्दा कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रायपुर में सड़कों पर उड़ने वाली काली धूल, निर्माण कार्यों से उठता मलबा, ट्रांसपोर्ट नगर और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला धुआं और बढ़ते वाहनों का दबाव प्रदूषण को लगातार बढ़ा रहा है। शहर के कई इलाकों में सुबह-शाम धूल की परत साफ नजर आती है। लोगों को आंखों में जलन, खांसी, एलर्जी और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, अस्थमा और श्वसन संबंधी मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कणों का स्तर कई बार मानक सीमा के आसपास या उससे ऊपर पहुंच जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
क्या हैं प्रदूषण के प्रमुख कारण? शहर में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्य सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं होना औद्योगिक गतिविधियां और कोयला परिवहन डीजल वाहनों की बढ़ती संख्या खुले में कचरा जलाना कांग्रेस का आरोप है कि इन मुद्दों पर पर्यावरण विभाग और नगर निगम समन्वित कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। बड़ी संख्या में पहुंचे पदाधिकारी प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य, वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, पार्षद और विभिन्न मोर्चा-प्रकोष्ठों के पदाधिकारी मौजूद रहे। महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवादल सहित कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कांग्रेस ने मांग की है कि शहर के लिए ठोस प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना बनाई जाए, नियमित मॉनिटरिंग की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए क्षेत्र में हलचल रही, हालांकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा। अब देखना होगा कि बढ़ते जनदबाव के बीच पर्यावरण विभाग राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाता है।


