दीपक शर्मा| श्रीगंगानगर राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में लगातार उजागर हो रही धांधलियां के बीच श्रीगंगानगर जिले से भी फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र से सरकारी नौकरी हथियाने का मामला सामने आया है। आरोपी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अभ्यर्थी सुरेंद्र कुमार पुत्र रामलाल ने बधिर श्रेणी (सुनने में दिक्कत) में 40 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर 9 अक्टूबर 2023 को घड़साना ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, 7 केएनडी में तृतीय क्षेणी अध्यापक के पद पर ज्वाइन किया था। इस संबंध में निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा को इसकी शिकायत हुई। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) प्रारंभिक शिक्षा ने राजस्थान प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक सीधी भर्ती 2022 लेवल द्वितीय विषय सामाजिक अध्ययन शिक्षा में चयनित सुरेंद्र कुमार की जांच के लिए 14 मई 2025 को पीएमओ श्रीगंगानगर को एक पत्र लिखा। इसमें कार्मिक की दिव्यांगता की जांच 15 मई को मेडिकल बोर्ड से कराने को कहा। प्रमुख चिकित्साधिकारी राजकीय जिला अस्पताल की ओर से 24 मई को दी गई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सुरेंद्र कुमार की स्थायी दिव्यांगता केवल 8 प्रतिशत ही है। इस पर जिला परिषद के सीईओ ने 23 सितंबर को एक आदेश जारी करते हुए अध्यापक सुरेंद्र कुमार की नियुक्ति को निरस्त करते हुए राज्य सेवा से निष्कासित कर दिया। सुरेंद्र कुमार ने दो साल सरकारी नौकरी कर ली। विद्यालय भी लगातार जाता रहा। सरकार से वेतन भी मिला। बड़ा सवाल ये है कि इस अवधि के दौरान किसी को भनक तक नहीं लगी? सुरेंद्र कुमार की जन्मतिथि 28 फरवरी 1985 है। उसका चयन ओबीसीएम (एचआई) में हुआ। अभ्यर्थी ने आवेदन-पत्र के साथ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से जारी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र संख्या एसएपी/2022/1254381 दिनांक 13 अप्रैल 2022 को संलग्न किया था। संलग्न प्रमाण-पत्र के अनुसार अभ्यर्थी की दिव्यांगता दोनों कानों में 40 प्रतिशत बताई गई। जबकि जिला अस्पताल की ओर से पुन: जांच में आरोपी की स्थायी दिव्यांगता 8 प्रतिशत ही निकली। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग का प्रमाण-पत्र भी सवालों के घेरे में है। जिला स्थापना समिति की बैठक में लिया निर्णय: उक्त प्रकरण को जिला परिषद ने संपूर्ण तथ्यों को वर्णित करते हुए 27 मई 2025 को निदेशक प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर को आगामी कार्रवाई के लिए प्रेषित किया। इस पर निदेशालय ने 19 मई को निर्देशित किया कि जिला परिषद की स्थापना समिति अध्यापक पद के लिए सक्षम नियुक्ति प्राधिकारी घोषित है। निदेशक ने कमेटी का गठन कर प्रकरण का परीक्षण करवाया। इसके बाद 26 जून 2025 को जिला स्थापना समिति रखी गई। इसमें उक्त प्रकरण रखा गया। 2 जुलाई को जांच दल का गठन कर प्रकरण का परीक्षण करवाया गया। जांच दल ने भी रिपोर्ट में सुरेंद्र कुमार की ओर से पेश किए गए दिव्यांगता प्रमाण-पत्र में भिन्नता होने की बात कही। इस पर सीईओ ने सुरेंद्र कुमार को उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक भर्ती 2022 (सामान्य शिक्षा) लेवल द्वितीय विषय सामान्य अध्ययन दिव्यांग श्रेणी के लिए अपात्र मानते हुए 18 सितंबर 2025 को राज्य सेवा से तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने के आदेश जारी किए।


