प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय उपसेवा केंद्र बयाना में संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा का 57वां स्मृति दिवस रविवार को विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया गया। यह आयोजन श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अनुयायी और साधक मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ब्रह्माकुमारी कमलेश बहन ने ब्रह्मा बाबा को प्राप्त दिव्य दृष्टि के वरदान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब शिव बाबा ने ब्रह्मा बाबा के तन में प्रवेश किया, तब उनके मुख से “निजानंद स्वरूपं शिवोहम् शिवोहम्, ज्ञानस्वरूपं शिवोहम् शिवोहम्, प्रकाश स्वरूपं शिवोहम् शिवोहम्” जैसे दिव्य महावाक्य प्रकट हुए थे। ब्रह्माकुमारी कमलेश ने यह भी बताया कि ब्रह्मा बाबा ने पहले स्वयं जीवन में उतारकर फिर बच्चों को तीन मूल शिक्षाएं दीं: निराकारी, निर्विकारी और निरहंकारी बनना। जीवन को कामों के बारे में बताया
विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद अरविन्द शर्मा ने कहा कि ब्रह्मा बाबा द्वारा किए गए ईश्वरीय कार्य में सभी का सहयोग न केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए, बल्कि भारत और पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा। उन्होंने जोर दिया कि इससे वर्तमान समय की अनेक समस्याओं का समाधान संभव है। ब्रह्माकुमारी साक्षी बहन ने ब्रह्मा बाबा के जीवन-परिचय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हीरे-जवाहरात के व्यापार से उनका मन हट गया था और उन्होंने स्वयं को परमात्मा के कार्य में तन-मन-धन से समर्पित कर दिया था। ब्रह्माकुमार संजीव भाई ने ब्रह्मा बाबा की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अत्यंत निरहंकारी थे और कभी भी ‘मैं-मेरा’ की भावना से बात नहीं करते थे। ममता बहन ने बताया कि बाबा कभी भी किसी की कमी या कमजोरी का उल्लेख नहीं करते थे, बल्कि सभी में अच्छाई देखने की प्रेरणा देते थे। इस अवसर पर शिक्षाविद भावना ने ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा बताए गए मार्ग को जीवन का सबसे श्रेष्ठ रास्ता बताया। ब्रह्माकुमार टीकम भाई ने जानकारी दी कि ब्रह्मा बाबा बाल्यकाल से ही भगवान श्री नारायण के भक्त थे। ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में चन्द्रकान्त, चन्द्रप्रकाश, दयाराम, पुष्पा, माया, मधु, इंद्रा, चिन्तामणि सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में विश्व शांति की कामना के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।


