बर्ड विलेज से सुखद खबर:दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक नेक्ड स्टार्क की मेनार में पहली बार ब्रीडिंग, दुनिया में ये महज 35 हजार, आईयूसीएन की रेड लिस्ट में

बर्ड विलेज मेनार के तालाब इन दिनाें विदेशी पक्षियाें की कलरव से आबाद हैं। यहां करीब 200 प्रजातियाें के पक्षियाें ने डेरा डाला हुआ है। इस बीच तालाब पर पहली बार दुर्लभ प्रजाति के पक्षी ब्लैक नेक्ड स्टार्क की ब्रीडिंग की सुखद खबर भी सामने आई है। यह खबर इसलिए भी खास है, क्योंकि इस प्रजाति के पूरी दुनिया में महज 35 हजार पक्षी ही हैं। इसलिए इसे इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में शामिल किया गया है। पक्षी प्रेमी दर्शन मेनारिया ने बताया कि ब्लैक नेक्ड स्टार्क की तीन वर्षों से निगरानी की जा रही है। इन्हाेंने यहां पहली बार ब्रीडिंग की है। जलाशय के बीच टापू पर देसी बबूल का पेड़ होने की वजह से इनके लिए कुनबा बढ़ाने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं। आमतौर पर ये अपने बड़े घोंसले पत्तों, लकड़ियों, घास आदि से एकांत जगह पर बनाते हैं। इसके लिए झीलों के आसपास बड़े और ऊंचे कांटेदार पेड़ों की जगह को चुनते हैं। मेनार के ब्रह्मसागर के बीचों-बीच जल क्षेत्र से घिरे देसी बबूल के सबसे ऊपरी छोर पर ब्लैक नेक्ड स्टार्क युगल ने अपना घोंसला बनाया। इन्हें अपने एक चूजे के साथ देखा गया है। खासियत…एक जगह एक ही जोड़ा रहता है, दूसरे को नहीं रहने देते तेजी से घट रही आबादी…ब्लैक नेक्ड स्टार्क में नर की आंखें गहरे रंग तो मादा के आंखों की पुतलियां पीले रंग की होती हैं। इनकी ऊंचाई 129-150 सेमी और पंखों का फैलाव 230 सेंटीमीटर होता है। वजन करीब 4 किलो होता है। यह वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 में संरक्षित जीव है। आईयूसीएन स्टेटस के अनुसार, दुनियाभर में इनकी आबादी तेजी से कम हो रही है। बर्ड लाइफ इंटरनेशनल के अनुसार इनकी अनुमानित आबादी 30 से 35 हजार है। सेवानिवृत्त एसीएफ डाॅ. सतीश शर्मा का कहना है कि ब्लैक नेक्ड स्टार्क दुर्लभ पक्षी है। इसे स्थानीय भाषा में लौह सारंग या श्याम कंठी सारस भी कहा जाता है। वैश्विक रूप से यह एक संकटग्रस्त प्रजाति है। इस पक्षी की खासियत यह है कि एक झील, तालाब में एक ही जोड़ा रहता है। ये दूसरे जोड़े को अपने आसपास नहीं देते हैं। यह भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यहां दक्षिणी राजस्थान के सिराेही, राजसमंद, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, उदयपुर आदि जिलाें के झीलाें, तालाब के किनारे इसके बसेरे हैं। इससे पहले गलियाकाेट में इसकी ब्रीडिंग हुई थी। मेनार में पहले कभी भी ब्रीडिंग की रिपाेर्ट नहीं मिली। ये भी सुखद…कभी प्रवास पर आता था ग्रेट क्रेस्टेड, अब मेनार में ही बसा
मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स भोजन की प्रचुरता और सुरक्षा की दृष्टि से परिंदों को प्रजनन के लिए मुफीद लगता है। विदेशी पक्षी ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब कभी शीतकालीन प्रवास पर यहां आता था, लेकिन पिछले वर्षों से इसने मेनार के जलाशयों में प्रजनन करना शुरू कर इसे स्थायी आवास बना लिया है। इसके अलावा सफेद गिद्ध, सारस क्रेन, स्पूनबिल, ब्लैक हेडेड आइबिस, व्हाइट ब्रेस्टेड वाटर हेन, पर्पल स्वाम्प हेन, कॉमन कूट, स्पॉट बिल्ड डक, कॉम्ब डक जैसे एक दर्जन से अधिक पक्षी मेनार में घोंसले बनाकर प्रजनन करते हैं। हाल ही में यहां पर वन विभाग की ओर से टापू बनाए गए हैं। इन्हें देसी बबूल के साथ अब हैबिटेट के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में स्टार्क प्रजाति के अन्य पक्षियों की ब्रीडिंग साइट बनेगी।

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