बर्ड वॉचर की रिपोर्ट:सालभर हरियाली, पानी की वजह से पक्षियों का स्थायी ठिकाना

रालामंडल अभयारण्य में किए गए पक्षी, चिड़ियाओं की प्रजातियों के सर्वे में विशेषज्ञों ने रिपोर्ट दी है कि यहां सालभर हरियाली रहने, पानी की पर्याप्त व्यवस्था, घास के मैदान होने की वजह से पक्षियों की प्रजाति में वृद्धि हुई है। तेंदुए का कुनबा भी यहां बढ़ रहा है। हाल ही में डियर सफारी एरिया में मादा तेंदुआ दो शावकों के साथ दिखी थी। घोषित रूप से यहां पहले तीन तेंदुए थे। अब इनकी संख्या भी 6-7 के बीच हो गई है।
8 दिसंबर को यहां सुबह 6 से 11 बजे के बीच पक्षी प्रेमियों ने फोटो खींचकर पक्षियों की प्रजातियां पता लगाने का प्रयास किया था। सर्वे में पता चला है कि यहां 110 से अधिक तरह के पक्षियों का बसेरा है। हालांकि कई प्रजातियां प्रवासी हैं, जो ठंड में यहां आ जाती हैं। इसलिए बढ़ी पक्षियों की प्रजातियां
रालामंडल अधीक्षक योहान कटारा के मुताबिक डियर सफारी एरिया और एनिमल जोन में जगह-जगह पानी की व्यवस्था की गई है। रालामंडल के पीछे भी एक कुंड है, जिसमें सालभर पानी रहता है। वहीं डियर सफारी एरिया के रूप में ग्रास लैंड भी है, जिसकी वजह से पक्षियों का बसेरा स्थायी रूप से बन गया है।
ग्रीन वॉल पक्षियों की नई कॉलोनी
रालामंडल में बायपास के समीप सीमेंट की दीवार के बजाय मियावाकी पद्धति से पेड़, पौधों की ग्रीन वॉल बनाई गई थी। यह ग्रीन वॉल 20 फीट चौड़ी और 250 लंबी हो गई है। ग्रीन वॉल इतनी घनी है कि इसे क्रॉस नहीं किया जा सकता। इस ग्रीन वॉल में दर्जनों प्रजाति की चिड़ियाओं ने सैकड़ों घोसले बना लिए हैं। वहीं तेंदुआ भी इसमें आकर बैठ जाता है। एनिमल जोन तेंदुए की टेरेटरी
रालामंडल का एनिमल जोन तेंदुआ परिवार की टेरेटरी बन गया है। 2022 तक यहां तीन तेंदुए थे। हाल ही में रालामंडल के स्टाफ को दो शावक और मादा तेंदुआ भी दिखी थी। शाम से रात के बीच में गश्ती के दौरान यह कई बार दिख चुके हैं। इन्हें मिलाकर अब संख्या 6-7 हो गई है। दरअसल, रालामंडल में चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, जंगली खरगोश, चिंकारा, मोर, आवारा कुत्तों के रूप में आसानी से शिकार मिल जाते हैं। इस वजह से इनकी संख्या पनप रही है। मलेंडी में जानवरों का शिकार जारी
इधर, मलेंडी में ग्रामीणों के मवेशियों का शिकार जारी है। सुबह मवेशी जंगलों में घास खाने के लिए जाते हैं। तेंदुआ या बाघ इनका शिकार कर रहा है। पांच दिन पहले ही एक बैल का शिकार हुआ है। वहीं आशापुरा में भी दिन के वक्त खेत में तेंदुआ जाता हुआ दिखा था।

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