बलौदाबाजार जिले के पलारी ब्लॉक स्थित सिसदेवरी गांव के किसान नोहर चंद्राकर को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने नवाचारी खेती के लिए सम्मानित किया है। किसान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मंच पर यह सम्मान छत्तीसगढ़ की कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। नोहर चंद्राकर 13 एकड़ में सरसों की खेती करते हैं, जिसे वे ‘बिना झंझट की खेती’ बताते हैं। उनके अनुसार, सरसों की फसल को न तो बंदर या अन्य जानवर नुकसान पहुंचाते हैं और न ही इसमें किसी खास बीमारी का प्रकोप होता है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है। इसकी कटाई भी हार्वेस्टर से आसानी से हो जाती है। इस पद्धति से वे प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल तक का उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। सरसों से तेल बनाकर और खली बेचकर बढ़ाई आय नोहर की सफलता का एक प्रमुख कारण उनकी बाजार समझ और मूल्य संवर्धन की रणनीति है। वे सरसों को सीधे बेचने के बजाय उससे तेल निकालकर अपना स्वयं का बाजार तैयार करते हैं। इससे उन्हें सीधे बिक्री की तुलना में काफी अधिक आय होती है। तेल निकालने के बाद बची हुई सरसों की खली को भी वे अच्छे दामों पर बेचकर अतिरिक्त मुनाफा कमाते हैं। यह तरीका ‘कम लागत, अधिक लाभ’ के सिद्धांत पर आधारित है। भविष्य की योजनाओं के तहत, नोहर चंद्राकर सरसों के तेल और खली से बायो-ईंधन जैसे उत्पाद बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। यह कदम टिकाऊ कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में एक नया आयाम स्थापित कर सकता है। IARI द्वारा मिला यह सम्मान नोहर चंद्राकर के लिए पहला नहीं है। इससे पहले भी उनके कृषि नवाचारों को विभिन्न राष्ट्रीय मंचों पर सराहा और पुरस्कृत किया जा चुका है।


