‘पापा को हालातों ने मजबूर कर दिया था। पापा कहकर गए थे कि इस बार बाहर से कमा कर आऊंगा तो भतीजी की शादी करेंगे। सब ठीक हो जाएगा, लेकिन अब…सब खत्म हो गया। पापा ही हमारे घर के मुखिया थे। चाचा के बच्चों और पूरे परिवार का खर्च वही उठाते थे, अब उनकी लाश लौटी है।’ ये बातें छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार स्टील प्लांट हादसे में जान गंवाने वाले बद्री भुइयां (42) की बेटी परतनिया ने कही है। दरअसल, परतनिया के पिता बद्री भुइंया समेत बिहार के 6 लोगों की गुरुवार 22 जनवरी को स्टील प्लांट में हुए ब्लास्ट में जिंदा जलकर मौत हो गई थी। शुक्रवार शाम 4 बजे के बाद सभी 6 मृतकों की लाश उनके गृहग्राम पहुंची। दैनिक भास्कर रिपोर्टर गयाजी मुख्यालय से 110 किलोमीटर दूर डुमरिया के गोटिबांध गांव पहुंचे और मृतकों के परिजन से बातचीत की। 18 साल की खुशबू कुमारी और 35 साल की कांति कुमारी ने बताया कि ‘पापा ने समूह से कर्ज लिया था। हर महीने 17 हजार की किश्त देनी पड़ती थी। किश्त नहीं दे पा रहे थे, कर्ज बढ़ता जा रहा था। लोन चुकाने का इतना प्रेशर था कि पापा को काम के लिए गांव छोड़कर बाहर जाना ही पड़ा। हमें लगता था कि पापा कमाकर EMI चुका देंगे, कर्ज निपट जाएगा तो हमारे साथ आकर रहेंगे। फिर सब ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पापा कमाने गए थे, लेकिन उनकी मौत की खबर आई, फिर वे प्लास्टिक की पोटली में लिपटकर घर आए।’ वहीं कांग्रेस जांच दल ने मौके का निरीक्षण किया। जांच दल का कहना है कि प्रबंधन की ओर से जो जवाब दिए जा रहे हैं, उससे स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आ रही है। साथ ही दावा किया कि जहां मशीनों से काम करवाया जाना चाहिए था वहां लेबर काम कर रहे थे। मजदूरों को ट्रेनिंग भी नहीं दी गई थी। पढ़िए, पूरी रिपोर्ट… पहले देखिए ये तस्वीरें- कांग्रेस जांच दल ने किया निरीक्षण घटना के बाद कांग्रेस की जांच समिति ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच दल के संयोजक अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने कहा कि हमारी कमेटी घटना की वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्थल निरीक्षण करने आई थी, लेकिन सबसे दुखद पहलू यह है कि फैक्ट्री प्रबंधन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं मिला। घटना को लेकर जो जवाब दिए जा रहे हैं, उनसे संपूर्ण और स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आ रही है। मैन्युअल लेबर से कराया जा रहा था खतरनाक काम कांग्रेस जांच दल के अनुसार जहां मशीनों से काम होना चाहिए था, वहां मैन्युअल लेबर से काम कराया जा रहा था। जिस एरिया में 900 से 1 हजार डिग्री तापमान वाली डस्ट लगातार गिर रही थी, वहां सफाई मजदूरों से करवाई जा रही थी। धनेन्द्र साहू ने कहा कि यह काम किसी भी स्थिति में मैन्युअल लेबर का नहीं है। इसके बावजूद यहां अप्रशिक्षित मजदूरों को लगवा कर प्रबंधन की ओर से काम करवाया जा रहा था। बिना ट्रेनिंग, अप्रशिक्षित मजदूरों से काम कांग्रेस जांच दल का दावा है कि 8 जनवरी से मजदूरों को इस काम पर लगाया गया था, लेकिन उन्हें कोई भी ट्रेनिंग नहीं दी गई। सीधे काम पर उतार दिया गया। प्रबंधन ने पैसा बचाने के चक्कर में मानव जीवन को खतरे में डाल दिया, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि घोर अपराध है। औद्योगिक सुरक्षा विभाग पर सवाल कांग्रेस जांच दल ने औद्योगिक सुरक्षा विभाग पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच दल के संयोजक ने कहा कोई भी दुर्घटना अचानक नहीं होती। मशीनरी सिस्टम में खराबी की जानकारी पहले ही एक्सपर्ट्स को हो जाती है। इसी कारण राज्य शासन के अधीन औद्योगिक सुरक्षा विभाग होता है, जो समय-समय पर मशीनरी और प्लांट का निरीक्षण करता है। प्रबंधन पर ठोस कार्रवाई की मांग कांग्रेस जांच दल ने कहा कि इन सभी बिंदुओं की तकनीकी जांच की जा रही है। उन्होंने मांग की कि फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, क्योंकि मृतक मजदूरों और उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की बनती है। पुलिस बोली- कंपनी एंड फर्म सोसायटीज से मांगी जानकारी वहीं रियल इस्पात फैक्ट्री में हुए दर्दनाक हादसे को 5 दिन बीत चुके हैं। पुलिस ने केवल अज्ञात अधिकारी, सुपरवाइजर और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की है।
SDOP तारेश साहू ने कहा कि मर्ग कायम करने के चलते हमने जल्द ही FIR की है। हमारी ओर से कंपनी एंड फर्म रजिस्ट्रेशन से जानकारी मांगी गई है कि रियल इस्पात एंड एनर्जी के प्रबंधक और कंपनी के पार्टनर कौन-कौन हैं। कंपनी एंड फर्म सोसायटीज के रजिस्ट्रार को ओर से जानकारी आने के बाद जो भी प्रबंधक होंगे वे आरोपी होंगे। मजदूरों को लाने वाला ठेकेदार और सुपरवाइजर घटना वाले दिन से फरार है।पुलिस की टीम ठेकेदार-सुपरवाइजर की तलाश कर रही है। इस घटना में जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब हादसे की ये तस्वीरें देखिए… अब जानिए, गांव में 6 शवों के पहुंचने पर परिजनों ने क्या कहा? किसी मजदूर पर 30 तो किसी पर 50 हजार रुपए का था कर्ज गांव के एक बुजुर्ग ने कहा कि गांव से 14 लोग कमाने गए थे। किसी पर 30 हजार रुपए तो किसी पर 50 हजार रुपए का कर्ज था। किसी ने समूह से लोन लिया था, तो किसी ने गांव के साहूकार से कर्ज उठाया था। कमाई थी नहीं, तो EMI नहीं चुका पाते थे। किश्त का दबाव इतना हो गया था कि मजदूरों का गांव में रहना मुश्किल हो गया था। गांव के लोगों ने मिलकर एक साथ बाहर जाने और कमाने का फैसला किया था। सभी रविवार को ये सोचकर निकले थे कि कुछ पैसे आएंगे तो कर्ज उतरेगा, घर संभलेगा। लेकिन कमाई तो दूर, जिंदगी ही छिन गई। 16 साल की बेटी बोली- पापा कमाने गए थे, अब उनकी लाश मिली मृतकों में शामिल 42 साल के बद्री भुइयां पहले कभी भी गांव से बाहर कमाने नहीं गए थे। बद्री 2 भाइयों में बड़े थे। पूरे घर की जिम्मेदारी उनके ऊपर ही थी। उनकी बेटी ने बताया कि भतीजी की शादी करनी थी, लिहाजा उन्होंने पहली बार घर से बाहर जाकर कमाने का सोचा और रविवार को ही गांव के अन्य लोगों के साथ कमाने के लिए छत्तीसगढ़ चले गए। लेकिन अब उनकी लाश लौटी है। 40 साल के विनय मांझी की बेटी बोली- बहन की शादी के लिए पापा ने कर्ज लिया था 40 साल के विनय मांझी की बेटी अस्मिता कुमारी ने कहा, पापा ने बड़ी बहन की शादी के लिए कर्ज लिया था। कर्ज वाले रोज दबाव बनाते थे। कुछ दिन पहले ही पापा गांव के लोगों के साथ कमाने गए थे। हम लोगों को बिल्कुल नहीं पता था कि पापा अब नहीं लौटेंगे। अस्मिता ने कहा कि हम पांच बहन हैं, बड़ी की शादी हो गई है। अब हम 4 बहनों की कौन देखभाल करेगा, हमारा क्या होगा। हादसे से जुड़ी ये तस्वीरें भी देखिए… 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म राख में जिंदा जले मजदूर भास्कर की पड़ताल में पता चला कि ब्लास्ट के वक्त डस्ट सेटलिंग चेंबर के भीतर लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म राख को पोकिंग के माध्यम से नीचे गिराया जा रहा था। इसी दौरान 11 मजदूर गर्म राख की चपेट में आ गए। इनमें 6 मजदूर जिंदा जल गए। परिजनों को पूरा मुआवजा दिया जाएगा- प्रबंधन वहीं प्लांट के मालिक नितेश अग्रवाल ने बताया कि रोज की तरह हाउस कीपिंग का काम चल रहा था, तभी डीएससी में डस्ट मटेरियल गिरा, जो काफी गर्म रहता है। मटेरियल नीचे काम कर रहे लोगों के ऊपर गिरने से ये हादसा हो गया। कंपनी की ओर से मृतकों को 20 लाख और घायलों को 5 लाख मुआवजा देने की घोषणा की गई है। स्पंज आयरन प्लांट के बारे में जानिए स्पंज आयरन प्लांट में लौह अयस्क (Iron Ore) से स्पंज आयरन तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया डायरेक्ट रिडक्शन तकनीक से होती है, जिसमें कोयला या गैस की मदद से अयस्क से ऑक्सीजन हटाई जाती है। इससे बना स्पंज आयरन आगे चलकर स्टील बनाने का कच्चा माल होता है, जिसे स्टील प्लांट में भेजा जाता है। हादसे से जुड़ी ये तस्वीरें भी देखिए…


