बसंत पंचमी पर आज अबूझ सावा, गजकेसरी सहित कई योगों में होगी मां सरस्वती की पूजा

भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा विद्या की देवी मां सरस्वती के पर्व बसंत पंचमी पर शुक्रवार को कई दुर्लभ संयोग रहेंगे। माघ शुक्ल पंचमी तिथि के दिन शुक्रवार को मध्याहन काल में उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और गजकेशरी, शिव योग का संयोग रहेगा। इस दिन अबूझ मुहूर्त में गृह प्रवेश,नौकरी, व्यापार की शुरुआत, भूमि पूजन, वाहन या किसी भी विशेष वस्तुओं की खरीददारी शुभ और फलदायी मानी जाती है। अबूझ मुहूर्त में एकल शादियों के साथ ही कई जगह सामूहिक विवाह सम्मेलन भी होंगे। विवाह मुहूर्त शुरू होने से पहले ही खरीदी के शुभ योग बनने से बाजारों मे खरीददारों की संख्या बढ़ने से चहल-पहल बढ़ी है। नगर व्यास राजेंद्रकुमार के अनुसार पंचमी तिथि गुरुवार की देर रात 2.30 बजे लग गई, जो शुक्रवार देर रात 1.47 बजे तक रहेगी। मां सरस्वती के पूजन का पर्व घरों, मंदिरों और शिक्षण संस्थान में दिनभर मनाया जाएगा। इस दिन नया काम करना बहुत ही फलदायक होता है। पीले रंग के वस्त्र या भोजन, अनाज में चावल व दाल और गुड़ जैसी वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है। इससे मां सरस्वती प्रसन्न होती है। सफलता और समृद्धि आती है। इस दिन बच्चों से सरस्वती का पूजन कराने के साथ ही 108 एंम नम: जाप कराएं। केसर को पानी में भीगो कर सरस्वती यंत्र पर तिलक लगाकर उसी से बच्चे की जिव्हा पर रजत व स्वर्ण सलाखा या अनार की कलम से एंम शब्द का लेखन करें, ताकि बालक विद्यावान बनेगा। सरस्ती पूजन का समय सुबह 7 से 11.15 बजे तक तथा दिन में अभिजीत 12.22 से दोपहर एक बजे तक है। विवाह मुहूर्त शुरू होने से पहले बन रहे हैं खरीदारी के शुभ योग मलमास के समापन के साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो चुकी है। अगले महीने यानि 4 फरवरी से विवाह मुहूर्त फिर से शुरू होंगे। शुक्रवार को बसंत पंचमी, रवि, परिधि और शिव योग है। सगाई, ज्वेलरी, कपड़े, पूजा सामग्री व शुभ वस्तुओं की खरीददारी के लिए सर्वोत्तम दिन है। 25 को भी रवि योग का संयोग है। 27 व 28 को सर्वार्थसिद्धि योग और 29 को मृगशिरा नक्षत्र, जया एकादशी है। एक फरवरी को रवि पुष्य योग, सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा।

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