बसंत पंचमी पर मुक्त छंद कविता में जीवंत हुए महाप्राण कवि निराला

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव बसंत पंचमी के अवसर पर स्थानीय मिथिला धाम में छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति द्वारा मां सरस्वती का विधिवत पूजन किया गया। महा कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती श्रद्धा और साहित्यिक गरिमा के साथ मनी। आयोजन समाजसेवी शारदा तिवारी के मुख्य आतिथ्य में हुआ, अध्यक्षता समिति के संरक्षक अशोक चौधरी ने की। कवि-साहित्यकारों ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना कर मुक्त छंद के प्रवर्तक निराला को उनकी प्रसिद्ध कविता वर दे वीणा वादिनी के माध्यम से स्मरण किया। कवि सुषमा शुक्ला ने बालिका दिवस पर सुमधुर बासंती कविता का गायन किया। कार्यक्रम में कवि प्रकाश साहू ने तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा का नारा देने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस को काव्यांजलि अर्पित की। समिति के अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा ने मां सरस्वती के चरणों में गीत समर्पित करते हुए निराला की रचना सखि बसंत आया का सस्वर पाठ किया। कवि अनिता जैन ने नेताजी को मां भारती का सच्चा सपूत बताते कविता प्रस्तुत की। मिथिला धाम मंदिर के संरक्षक अशोक चौधरी ने बसंत पंचमी को भगवान शंकर-पार्वती की सगाई पर्व से जोड़ते हुए निराला के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उनके व्यक्तित्व और रचनाओं पर उनको याद किया गया। निराला केवल मुक्त छंद के नहीं वैविध्यपूर्ण काव्य के सृजनकर्ता अशोक चौधरी ने कहा बंगाल के महिषादल निवासी निराला केवल मुक्त छंद के प्रतिनिधि कवि नहीं, पहलवान और वैविध्यपूर्ण काव्य के सृजनकर्ता थे। कमला कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. केके द्विवेदी ने निराला को मुक्त छंद कविता का प्रवर्तक बताते हुए उन्हें आध्यात्मिकता और प्रेम रस का अग्रदूत कहा। वरिष्ठ साहित्यकार आत्माराम कोशा ने निराला के शब्दों को उद्धृत करते कहा जैसे मनुष्य की मुक्ति कर्म बंधन से है, वैसे ही कविता की मुक्ति छंदों के बंधन से है। परिचर्चा के दौरान कवि रिखी पटेल ने निराला की चर्चित कविता ओ गुलाब का पाठ किया। वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर साहू ने छायावाद युग की चर्चा करते कहा कि निराला ने छंदों के स्थापित मानदंडों को तोड़कर कविता को नई दिशा दी।

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