रामगढ़ में आगामी 3 फरवरी को मनाई जाने वाली बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की प्रतिमा का निर्माण तेजी से चल रहा है। स्थानीय मूर्तिकार श्रद्धालुओं की मांग के अनुसार 2 फीट से लेकर 6 फीट तक की विभिन्न आकार की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। यहां की मूर्ति निर्माण की परंपरा करीब 300 साल पुरानी है। एक मूर्तिकार, जो पिछले 40 वर्षों से इस कला में संलग्न हैं, ने बताया कि उनका परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। सरस्वती पूजा के अवसर पर मूर्तियों की सबसे अधिक मांग रहती है। क्योंकि स्कूल, कोचिंग संस्थान और विभिन्न सामाजिक संगठन विद्या की देवी की पूजा के लिए मूर्तियां खरीदते हैं। हालांकि, पिछले 20 वर्षों में सरस्वती पूजा के प्रति लोगों के उत्साह में कमी आई है। पहले जहां यह त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता था और बच्चों में विशेष उत्साह देखा जाता था। वहीं अब इसका महत्व कुछ कम होता जा रहा है। फिर भी, अन्य धार्मिक अवसरों की तुलना में सरस्वती पूजा के लिए मूर्तियों की मांग अधिक बनी हुई है, जो स्थानीय मूर्तिकारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है।


