बस्तर का 135 साल पुराना ‘लाल चर्च’:बेल फल-चूना-गोंद के घोल से हुई ईंटों की जोड़ाई, 7KM दूर तक सुनाई देती थी घंटी की आवाज

बस्तर के जगदलपुर में एक अंग्रेजी हुकूमत के दौर का ऐतिहासिक चर्च है, जिसे ‘लाल चर्च’ के नाम से जाना जाता है। जगदलपुर का यह 135 साल पुराना ‘लाल चर्च’ संभाग का सबसे पुराना और प्रसिद्ध चर्च है। वैसे तो छत्तीसगढ़ के बस्तर में कई चर्च स्थित हैं। हर चर्च की अपनी एक अलग खासियत और विशेषता है। उस दौर में मिशनरियों ने इस चर्च बनाने के लिए लाल ईंट, बेल फल, गोंद और चूना का इस्तेमाल किया था। 1890 में रखी थी चर्च की नींव लाल चर्च कमेटी के सदस्य सदस्यों की मानें तो साल 1890 का वो दौर था जब रायपुर से मिशनरी सीबी वार्ड बैलगाड़ी से बस्तर पहुंचे थे। उन्होंने बस्तर के काकतीय वंश के एक राजा से मुलाकात की। राजा ने जगदलपुर में उन्हें जमीन दान की। मिशनरी ने 1890 में ही उस जमीन पर चर्च की नींव रख दी। धीरे-धीरे निर्माण काम शुरू किया गया। 33 सालों में निर्माण हुआ था पूरा बेल फल, चूना और गोंद का घोल बनाकर ईंटों जो जोड़ा गया था। हालांकि, काम ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ा था। इस चर्च को बनने में करीब 33 साल लग गए थे। फिर, सन 1933 में निर्माण काम पूरा कर लिया गया। मिशनरियों ने इस चर्च को ऐतिहासिक बनाने इस चर्च में सिर्फ एक ही रंग का इस्तेमाल करने का विचार बनाया और लाल रंग का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया था। 30 से 40 फीट है चर्च की ऊंचाई इस चर्च के बाहर के हिस्से की पुताई लाल रंग से करवाई गई। लेकिन, अंदर सफेद रंग का इस्तेमाल किया गया था। चर्च में जिन-जिन चीजों का इस्तेमाल किया गया वे सभी लाल रंग के ही थे। चर्च की ऊंचाई करीब 30 से 40 फीट है। यदि ऊंचाई से देखा जाए तो चर्च क्रॉस के आकार में नजर आता है। 7 से 8 किमी तक सुनाई देती थी घंटी की आवाज चर्च में लगी घंटी की आवाज करीब 7 से 8 किमी तक सुनाई देती थी। आड़ावल में रहने वाले लोग भी घर बैठे चर्च के ऊपरी हिस्से को देख लिया करते थे। उस दौर से इस चर्च को लाल चर्च कहा जाने लगा। जो इलाके में आज भी चर्चित है। यह लाल चर्च बस्तर संभाग का सबसे बड़ा चर्च है। वर्तमान में इसे चंदैय्या मेथोडिस्ट एलिस्कोपल भी कहा जाता है। स्ट्रक्चर से नहीं करते छेड़छाड़ चर्च की दीवारों में प्लास्टर नहीं हुआ है। आज भी इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की जाती है। वर्तमान में इस चर्च में ईसाई समुदाय के करीब 4 हजार से ज्यादा लोग प्रार्थना करने पहुंचते हैं। आज क्रिसमस के मौके पर यहां विभिन्न तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। चर्च शानदार सजाया गया है। जो आकर्षण का केंद्र है। ………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… क्रिसमस पर जानिए बाइबिल के छत्तीसगढ़ी अनुवाद की कहानी: विश्रामपुर में जर्मन ने बनवाया था पहला चर्च; यहीं से प्रदेश में फैली क्रिश्चियनिटी ​​​​​​​ दुनियाभर में क्रिसमस का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी इस अवसर पर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। यहां कई चर्च अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। मसीही समाज के सबसे बड़े पर्व, प्रभु यीशु मसीह (जीसस क्राइस्ट) के जन्मदिवस के मौके पर जानिए छत्तीसगढ़ में पहला चर्च कब और कहां स्थापित हुआ, और प्रदेश के कोने-कोने में ईसाई धर्म का प्रसार कैसे हुआ। पढ़ें पूरी खबर…

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