केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मंगलवार को वाराणसी में मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि 26वीं बैठक बस्तर में आयोजित की जाएगी। अभी इसकी तिथि तय नहीं हुई है। परिषद ने बस्तर क्षेत्र को शांति, स्थायित्व और विकास के एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखा है। वरिष्ठ अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि परिषद की अगली बैठक तक बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में निर्णायक प्रगति हो चुकी होगी। यह घोषणा राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय और सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रमाण है। वाराणसी में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के अलावा उप्र, मप्र और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री शामिल हुए। चारों सीएम ने पिछले साल लिए गए निर्णय के क्रियान्वयन को लेकर राज्यों ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने परिषद को बताया कि पिछली बैठक में दिए गए सुझावों पर तेजी से अमल हुआ है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 28 नई बैंक शाखाएं खुलीं। डॉयल 112 सेवा का विस्तार हुआ और 82 हजार से अधिक बच्चों को कुपोषण से बाहर निकाला गया। आयुष्मान भारत योजना में 87.2 प्रतिशत कार्ड बांटे जा चुके हैं। 1075 में से 1033 शासकीय अस्पताल इससे जोड़े जा चुके हैं। ये उपलब्धियां राज्य के विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। बता दें कि मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।
इसलिए चुना गया बस्तर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में इस तरह की उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन न केवल क्षेत्र के लिए गौरव की बात है, बल्कि इससे वहां के विकास को नई ऊर्जा भी प्राप्त होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बस्तर अब संघर्ष का नहीं, संभावनाओं का प्रतीक बनने की ओर अग्रसर है। भास्कर इनसाइट – स्कूलों में बच्चों के ड्रॉप आउट रेट पर होगी बात बस्तर में होने वाली अगली मीटिंग में राज्य में स्कूली शिक्षा की स्थिति पर भी चर्चा होगी। इसमें स्कूलों में बच्चों के ड्रॉप आउट रेट के साथ ही बच्चियों में कुपोषण की स्थिति पर भी बात होगी। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे पोषण अभियान के लक्ष्य को पूरा करने में आ रही चुनौतियां भी एजेंडे का हिस्सा होगी। बस्तर की मीटिंग में इन मुद्दों पर होगी बात: {महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों की जांच में तेजी {फास्ट ट्रैक कोर्ट और स्पेशल कोर्ट की स्थिति {पोषण अभियान के तहत बच्चियों के कुपोषण को दूर करना {स्कूलों में बच्चों के ड्रॉप आउट रेट की जानकारी {आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की प्रगति {सहकार से समृद्धि- सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदम।


