बस्तर पंडुम 2025:नक्सल इलाके में जनजातीय लोककला, संस्कृति का होगा प्रदर्शन

बस्तर की जनजातीय लोककला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए बस्तर पंडुम 2025 का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 10 से 29 मार्च तक चलेगा। तीन सत्रों में ब्लाकों में 10 से 19 मार्च, जिलों में 21 से 23 मार्च तथा संभागों में 27 से 29 मार्च तक कार्यक्रम होंगे। बस्तर संभाग के बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर व सुकमा इसमें शामिल होंगे। इसमें जनजातीय लोक संस्कृति, लोककला और शिल्प कला को पीढ़ियों से सहेजने वाले जनजातीय समूहों की कला को प्रोत्साहन मिलेगा। जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर को दुनिया में जीवंत रखा जाएगा। स्पर्धाओं में दलों की संख्या सात-सात होगी। हर दल में 40 से 50 सदस्य होंगे। बस्तर 32 ब्लाकों में स्पर्धाएं होंगी। कलाकारों को निशुल्क प्रवेश मिलेगा। चयन समिति ब्लाकवार हर विधा के दल का चयन करेगी। हर विधा के समूह का नाम एसडीएम सीईओ जिले को प्रतियोगिता में शामिल करने भेजेंगे। हर जिले के ब्लाकों से सात-सात दल जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होंगे। जिलों से भी सात-सात दल संभाग के लिए चयनित कर भेजे जाएंगे। प्रतियोगिता में समाज प्रमुखों, वरिष्ठ नागरिकों व जन प्रतिनिधियों को मुख्य अतिथि बनाया जाएगा। जिला व संभाग स्तर पर प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों को आमंत्रित कर कला का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रतियोगिताएं
1. जनजातीय नृत्य।
2. जनजातीय गीत।
3. जनजातीय नाट्य।
4. जनजातीय वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन।
5. जनजातीय वेशभूषा व आभूषणों का प्रदर्शन।
6. जनजातीय गोदना व कला का प्रदर्शन।
7. जनजातीय पेय पदार्थ एवं व्यंजन का प्रदर्शन।
8. संभाग स्तर पर जनजातीय रीति-रिवाज एवं तीज-त्योहारों, विवाद पद्धति नामकरण संस्कार की प्रदर्शनी। लोक नृत्य: गेड़ी नृत्य, गौर नृत्य, ककसार नृत्य, मांदरी नृत्य, दण्डामी नृत्य, एबालतोर नृत्य, गोरला-पेंडुल नृत्य, हुलकी पाटा नृत्य, परब नाच, घोटूल पाटा नृत्य, कोलांग पाटा – पुसकोलांग – देव कोलांग व डेडारी नृत्य।
लोक गीत: घोटुल पाटा, लिंगोपेन गीत, चैत परब गीत, लेजा गीत, रिलो गीत, कोटनी गाती, गोपल्ला गीत, जगार गीत – धनकुल, मरम पाटा गीत व हुलकी पाटा गीत। जनजातीय विधाएं
लोक नाट्य: माओपाटा व भतरा।
वाद्य यंत्र: धनकुल, ढोल, चितकुल, तोड़ी, अकुम, बावांसी, चिरडुड्डी, झाब, मादर, मृदंग, बिरिया, ढोल, सारंगी, गुदुंग, मोहरी, सुलुड, मुंडा बाजा, चिकारा,
शिल्प एवं चित्रकला: घड़वा कला, मिट्टी कला, काष्ठ कला, पत्ता शिल्प, ढोकरा कला, लौह शिल्प, प्रस्तर शिल्प, गोदना शिल्प, भित्ती चित्रकला, शिशल शिल्प, कोड़ी शिल्प। आभूषण – लुरकी, करधन, सुतिया, पैरी, बांहूटा, बिछिया, एंठी, बंधा, फुली, धमेल, नागमोरी, खोचनी, मुंदरी, सुर्रा, सुता पटा, पुतरी, ढार व नकबसेर।
पेय पदार्थ: सल्फी, ताड़ी, छिंदरस, हंडिया, पेज व कोसमा।

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