बस स्टैंड को लेकर नगर परिषद के पास 4 करोड़, चार साल में भी नहीं मिल पाई जमीन

बबलू मंडल| चक्रधरपुर चक्रधरपुर नगर परिषद के पास पिछले चार साल से बस स्टैंड की जमीन खरीदने को लेकर 4 करोड़ है, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है, जो चक्रधरपुर के लिए दुर्भाग्य है। बड़ी बात यह है कि दो लाख से अधिक की आबादी वाले नगर में बस स्टैंड का अभाव है। जबकि चक्रधरपुर नगर परिषद ही नहीं रेल मंडल भी है। जिस कारण चारोओर से लोगों का बस और ट्रेनों के माध्यम से चक्रधरपुर आवागमन होता है। ऐसी स्थिति में लोगों को अपने गंतव्य स्थल तक जाने के लिए सड़क किनारे बस पकड़नी पड़ती है। इस कारण बाजार में बस रुकने से ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ती है। जबकि सवारियों को बरसात, गर्मी या सर्दी के मौसम में खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। बस स्टैंड नहीं होने के कारण नगर के इतवारी बाजार, कुसुमकुंज, एलआईसी बिल्डिंग, प्रभात सिनेमा हॉल, पवन चौक, नगर परिषद कार्यालय, चेकनाका, मारवाड़ी हाई स्कूल आदि जगहों पर बसें खड़ी होती हैं। इन जगहों पर यात्री वाहन खड़े होकर सवारियां भरते हैं। इस कारण सड़क से गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चक्रधरपुर शहर में बस स्टैंड के लिए नगर विकास विभाग द्वारा चार करोड़ रुपए दिए गए हैं। वर्ष 2021-22 में यह राशि चक्रधरपुर नगर परिषद को बस स्टैंड के लिए जमीन खरीदने के लिए मिली है, लेकिन चक्रधरपुर में जमीन के अभाव के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। फिलहाल नगर परिषद के पास बस स्टैंड की जमीन खरीदने को लेकर चार करोड़ जमा है। ^चक्रधरपुर नगर परिषद क्षेत्र में जमीन का अभाव है। जिस कारण नगर से बाहर भी जमीन का तलाश किया जा रहा है। बस स्टैंड की जमीन खरीदने को लेकर नगर विकास विभाग से चार करोड़ रुपए मिले हैं। बहुत जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। राहुल यादव, प्रशासक नगर परिषद कार्यालय चक्रधरपुर। चक्रधरपुर प्रभात सिनेमा हॉल के समीप यात्रियों की सुविधा के लिए बस पड़ाव बनाया गया था, लेकिन रेलवे ओवरब्रिज बनने के कारण बस पड़ाव बेकार साबित हो गया। क्योंकि बस पड़ाव जाने के लिए बड़े वाहनों की सुविधा नहीं है। बस पड़ाव में एक भी बस खड़ी नहीं होती है। बस पड़ाव अब गैरेज एवं अन्य सामान रखने या गाड़ी रखने के अवैध पार्किंग का अड्डा बन गया है। नगर परिषद द्वारा 20 लाख रुपए खर्च कर यात्री शेड एवं 24 लाख रुपए खर्च कर 10 दुकानों का निर्माण कराया गया था। लेकिन दोनों योजनाओं के पूर्ण होने से पहले ही बस पड़ाव बंद हो गया। जिससे सरकार का लाखों रुपए बेकार हो गए।

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