बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में स्थित कबीर गुफा में हर साल होने वाली ‘कबीर यात्रा’ एक बार फिर विवादों में है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बाद भी वन विभाग ने यात्रा के लिए नियम और गाइडलाइन तैयार नहीं की और 4 से 5 हजार लोगों को वाहनों से कोर एरिया में प्रवेश की अनुमति दे दी। इसके चलते यात्रा से पहले ही हजारों श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा शुरू हो गया है। यात्रा 4 दिसंबर को होना है। बिना नियमों के अनुमति, टाइगर रिजर्व का रहवास खतरे में फील्ड डायरेक्टर ने वाहनों की सीमित क्षमता के चलते यात्रियों को पैदल यात्रा की अनुमति भी जारी कर दी है, जिसके कारण जंगल के कोर एरिया में बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों का रहवास प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। वन विशेषज्ञों का कहना है कि कोर एरिया में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का प्रवेश न केवल वाइल्ड लाइफ एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि मानव–वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ा देता है। NGT के आदेशों का सीधा उल्लंघन NGT ने 12 अगस्त 2025 को वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर आदेश दिया था कि तीन महीने के भीतर कबीर यात्रा के लिए नियम व गाइडलाइन बनाई जाए। यात्रा में शामिल होने वालों के लिए अनुमति ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से हो और आदिवासी क्षेत्र होने के चलते त्रि-स्तरीय समिति से अनुशंसा ली जाए, लेकिन इनमें से किसी भी बिंदु का पालन नहीं हुआ। पीसीसीएफ ने दी अनुमति चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन शुभरंजन सेन ने 25 नवंबर 2025 को 4–5 हजार लोगों को वाहनों से यात्रा की अनुमति जारी कर दी, जबकि त्रि-स्तरीय समिति की अनुशंसा भी नहीं ली गई। वहीं फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने भी अंतिम समय में 4 दिसंबर के लिए पैदल यात्रा की अनुमति मांगी, जिसे एक्टिविस्ट आदेशों का सीधा उल्लंघन बता रहे हैं। यह न्यायिक आदेशों का उल्लंघन-अजय दुबे वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि बांधवगढ़ का कोर एरिया बाघ, हाथी और तेंदुओं का बेहद संवेदनशील आवास है। बिना नियमों के हजारों लोगों को वाहनों से अंदर जाने देना जंगल और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा है। यह वन विभाग की लापरवाही ही नहीं, बल्कि NGT के आदेशों की खुली अवमानना है। दुबे ने पूरे मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए NGT में अवमानना याचिका दायर कर दी है। उसकी सुनवाई 4 दिसंबर 2025 को होगी। कौन जिम्मेदार?अभियानकर्ताओं के मुताबिक इस मामले के लिए सीधेतौर पर चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन शुभरंजन सेन और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय जिम्मेदार हैं। दोनों ने न तो वैधानिक नियम बनाए और न ही सुरक्षित एवं वैध प्रक्रिया का पालन किया। यात्रा से क्या प्रभावित होगा कोर एरिया में भारी भीड़ और वाहनों से जंगल की नाज़ुक पारिस्थितिकी पर संकट खड़ा होगा। वन्यजीवों की मूवमेंट बाधित होगी, बाघों की सुरक्षा प्रभावित होगी और हाथी व तेंदुओं से टकराव की आशंका बढ़ेगी। NGT में होने वाली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


