बांसवाड़ा जिले की साल 2024 की बड़ी घटनाएं:कांग्रेस दिग्गज नेता बीजेपी में शामिल, बीमा के लिए पति का मर्डर, तीसरा मोर्चा फ्रंट फुट पर आया

2025 के आने में 1 दिन बाकी है। राजनीति हो या अपराध इन घटनाओं ने पूरे बांसवाड़ा ​को घटनाओं ने हिलाकर रख दिया। कैलंडर पर इस साल के कई दिन और तारीख भूले से भी नहीं भुलाए जाएंगे। 2024 कई मायनों में अपनी छाप छोड़कर जा रहा है। आइए रिकॉल करते हैं इन घटनाओं को भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता महेंद्र जीत सिंह मालवीया कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे और पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया साल के दूसरे माह फरवरी में भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने इससे पहले कांग्रेस के टिकट पर 2 महीने पहले ही बागीदौरा विधानसभा सीट से भाजपा को हराया था और विधायक बने थे। लेकिन सरकार बदलने के बाद मालवीया का यह फैसला वागड़ की राजनीति में सबसे चौंकाने वाला साबित हुआ। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद मालवीया ने कांग्रेस पर कई कड़े प्रहार किए। फिर लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी बने लेकिन हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने डोटासरा को पागल तक कह दिया। उन्होंने कहा था कि मेरी जॉइनिंग से कांग्रेस पार्टी कांप गई। वागड़ की राजनीति में पहले ही चुनाव में तीसरा मोर्चा जीता राजनीतिक दृष्टि से बांसवाड़ा में 2024 का दूसरा सबसे बड़ा मामला चर्चा में रहा वो BAP प्रत्याशी राजकुमार रोत का सांसद बनना। पहले ही लोकसभा चुनाव में BAP ने जीत दर्जकर वागड़ ही नहीं बल्कि ओर टीएसपी क्षेत्र की राजनीतिक समीकरण बदल दिए। भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार रोत ने भाजपा प्रत्याशी महेंद्रजीत सिंह मालवीया को 2,47,054 मतों से हरा दिया। रोत को 8,20,831 वोट मिले थे। भाजपा के महेंद्रजीत सिंह मालवीया को 5,73,777 और कांग्रेस के अरविंद डामोर को 61211 वोट मिले। इसके बाद राजकुमार ट्राइबल क्षेत्र में एक प्रभावशाली नेता और युवा चेहरा बनकर उभरे। एक्सीडेंटल मौत बताकर क्लेम लेने में पीएमओ गिरफ्तार जुलाई माह में बांसवाड़ा कोतवाली पुलिस ने फर्जी बीमा क्लेम के एक पुराने प्रकरण में बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया था। जिसमें डॉक्टर सहित पुलिस के अधिकारी कर्मचारी रहे। इस मामले में सबसे बड़ी गिरफ्तारी पूर्व पीएमओ एमजी अस्पताल डॉक्टर रवि उपाध्याय की हुई। एक एएसआई योहन कुमार का नाम शामिल थे। इसमें योगेंद्र नामका युवक ने रिपोर्ट दी थी। बताया था कि 14 मई 2016 को उसके पिता देवेंग पटेल रात को बाथरुम जाने का कहकर बाहर निकले थे। अचानक पैर फिसलने से नीचे गिर गए। बेहोश भी हो गए। उन्हें तत्काल इलाज के लिए महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बीमा कंपनी ने रिपोर्ट दी थी कि मौत कैंसर से हुई है। क्लेम की रकम के लिए यह साजिश रची गई। 50 लाख रुपए के लिए पति की हत्या 25 दिसंबर को 50 लाख रुपए के बीमा के लिए बांसवाड़ा के सदर इलाके में पत्नी ने बहन और प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी। एक्सीडेंट का रूप देने के लिए शव को हाईवे पर पटककर गाड़ी से कुचल दिया। तीनों को गिरफ्तार किया गया। दो आरोपी फरार हो गए। एसपी हर्षवर्धन अगरवाला ने बताया था- हत्या के मामले में कांता (35) पत्नी कालू, उसकी बहन कमला (42) पत्नी पेमा कटारा, कांता के प्रेमी दिनेश मईडा (38) निवासी पलोदरा को गिरफ्तार किया। मृतक के हाथ पर अंग्रेजी में KALU लिखा हुआ था। पावर प्लांट का विरोध, पुलिस का लाठीचार्ज इस साल अगस्त माह में राजस्थान के बांसवाड़ा में बन रहे माही न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। प्लांट के लिए जमीन खाली कराने गई पुलिस पर यहां रह रहे लोगों ने पथराव कर दिया। वहीं जवाब में पुलिस ने भी हाईवे जाम कर रही महिलाओं को खदेड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़े। करीब 3 घंटे चली हिंसा में पुलिस के 3 जवान और कुछ ग्रामीण घायल हुए। पुलिस ने भारत आदिवासी पार्टी के एक नेता समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया। विवाद के बाद पुलिस ने पावर प्लांट के लिए जमीन खाली कराई। बांसवाड़ा के छोटी सरवन में 2800 मेगावाट का न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए लोगों को शिफ्ट करने के दौरान यह घटना हुई। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने पुलिस से मदद मांगी थी। बांसवाड़ा से छीना संभाग का दर्जा दिसंबर माह में ही बांसवाड़ा को एक बड़ा झटका सरकार ने दिया। कांग्रेस सरकार के समय बने नए जिलों में से 9 जिलों और 3 संभागों को भजनलाल सरकार ने खत्म करने का फैसला लिया। पाली, सीकर, बांसवाड़ा संभाग भी खत्म कर दिए । सरकार के इस फैसले को लेकर बांसवाड़ा में नाराजगी भी देखने को मिली। निर्णय के बाद स्थानीय जनजाति लोगों को और सरकारी कार्मिकों को संभाग स्तर के काम के लिए उदयपुर तक करीब 165 से 210 किमी तक का सफर तय करना पड़ेगा। गत कांग्रेस सरकार ने बांसवाड़ा संभाग में बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जोड़ा था। पूर्व संभागीय आयुक्त नीरज के पवन भी हर सप्ताह डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों का दौरा कर रहे थे।

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