बांसवाड़ा में करीब डेढ़ साल पुराने पावर प्लांट विवाद को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इस मामले में नामजद 52 ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को बीएपी के विधायक प्रत्याशी रहे हेमंत राणा के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक से मिला। ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस जल्द से जल्द कोर्ट में चालान पेश करे, ताकि राज्य सरकार स्तर पर मुकदमा वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सके। डेढ़ साल से कोर्ट के चक्कर, चालान अब तक पेंडिंग एसपी से मुलाकात के बाद हेमंत राणा ने बताया कि करीब 18 महीने पहले पावर प्लांट को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान महिलाओं और पुरुषों सहित कई ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया था।
राणा ने कहा कि नामजद ग्रामीण पिछले डेढ़ साल से कोर्ट में पेशियां भुगत रहे हैं, लेकिन पुलिस की ओर से अब तक चालान पेश नहीं किया गया है। इससे मामला अधर में लटका हुआ है और ग्रामीण मानसिक व आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान हुआ था समझौता हेमंत राणा ने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पावर प्लांट के उद्घाटन के लिए बांसवाड़ा आए थे, तब सांसद राजकुमार रोत और विधायक जयकृष्ण पटेल के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया गया था।
इस दौरान मुख्यमंत्री और आला प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में यह सहमति बनी थी कि पावर प्लांट आंदोलन से जुड़े ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे। एसपी ने SHO को किया तलब, जल्द चालान पेश करने के निर्देश राणा ने बताया कि पुलिस अधीक्षक ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद संबंधित SHO को तत्काल तलब किया। एसपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मामले में जल्द से जल्द कोर्ट में चालान पेश किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि चालान की प्रति मिलने के बाद वे इसे राजस्थान सरकार को भेजेंगे, ताकि पहले हुए समझौते के अनुसार केस विड्रॉल की प्रक्रिया पूरी हो सके और उन्हें राहत मिल सके। ग्रामीण बोले – वादा पूरा हो, तभी खत्म होगा आंदोलन का दर्द प्रतिनिधिमंडल में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते। सरकार और प्रशासन से सिर्फ यही मांग है कि जो वादा किया गया था, उसे पूरा किया जाए और निर्दोष ग्रामीणों को लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया से मुक्ति दिलाई जाए।


