श्योपुर जिले के कोटरा गांव में रविवार को एक बुजुर्ग महिला की अंतिम यात्रा के दौरान श्मशान घाट के रास्ते पर अतिक्रमण के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह घटना श्मशान भूमि पर अवैध कब्जों की समस्या को उजागर करती है। जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर शंकरपुर पंचायत के कोटरा गांव निवासी बर्फी बाई (70) पत्नी खेतूलाल मीणा का निधन हो गया था। जब उनकी शवयात्रा श्मशान घाट के लिए निकली, तो परिजनों और ग्रामीणों को रास्ते में बाधाओं का सामना करना पड़ा। श्मशान तक जाने वाले सार्वजनिक रास्ते को खेतों में बदल दिया गया था और उस पर पत्थरों की बाउंड्री तथा तार की जालियां लगा दी गई थीं। बाउंड्री और तार की जालियां हटाकर निकला शव शवयात्रा को चार अलग-अलग स्थानों पर रोकना पड़ा। ग्रामीणों को पत्थरों की बाउंड्री और तार की जालियां हटाकर खेतों के बीच से शव को श्मशान घाट तक ले जाना पड़ा। इस दौरान ग्रामीणों को काफी परेशानी हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान की भूमि और रास्ते पर पहले भी अतिक्रमण किया गया था। शिकायत के बाद प्रशासन ने इसे हटवा दिया था, लेकिन बाद में प्रशासनिक मिलीभगत से दोबारा कब्जा कर लिया गया। ग्रामीणों ने बताया श्मशान घाट पहुंचने के लिए रास्ता नहीं ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान घाट पर टीनशेड और चबूतरे जैसे निर्माण कार्य तो किए गए हैं, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए आज तक कोई स्थायी रास्ता नहीं बनाया गया। इस संबंध में पंचायत और प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। श्मशान के रास्ते पर लोगों ने कब्जा कर लिया मृतका के बेटे हरिओम मीणा ने बताया, “श्मशान के रास्ते पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। शवयात्रा ले जाने तक का रास्ता नहीं बचा है। हमें हर बार इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।” कोटरा गांव की यह घटना स्थानीय प्रशासन और पंचायत की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब श्मशान तक पहुंचने का रास्ता ही सुरक्षित नहीं है, तो वे सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कैसे कर पाएंगे?


