बाघिन को पकड़ने जंगल में लगाए 60 कैमरे, तब पकड़ाई:50 वनकर्मियों को 25 दिन छकाती रही; सेना के हेलिकॉप्टर से राजस्थान भेजा

सिवनी के पेंच टाइगर रिजर्व से लगभग 600 किमी दूर राजस्थान में बूंदी स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व तक बाघिन PN-224 का हवाई ट्रांसलोकेशन किया गया। इसे 21 दिसंबर की शाम 5:30 बजे वायुसेना के हेलिकॉप्टर की मदद से अंजाम दिया गया। यह मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच पहला अंतरराज्यीय हवाई बाघ ट्रांसलोकेशन है। राजस्थान के बाघों के जीन पूल को मजबूत करने के लिए यह पूरा अभियान 25 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद सफल हो सका। बाघिन PN-224 कुछ समय पहले ही अपनी मां से अलग हुई है। वह पेंच टाइगर रिजर्व में खुद की टेरिटरी बना रही थी। 25 दिन तक वन विभाग की 50 सदस्यों वाली टीम को छकाने के बाद आखिरकार 8 हाथी दलों ने PN-224 को घेरकर काबू किया। इसके बाद उसे ट्रेंकुलाइज किया गया। तब जाकर ट्रांसलोकेशन किया जा सका। पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने दैनिक भास्कर को इस अंतरराज्यीय हवाई बाघ ट्रांसलोकेशन की पूरी कहानी बताई। पढ़िए, रिपोर्ट… रेडियो कॉलर टूटने के बाद PN-230 को लिस्ट में शामिल किया
डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया- पेंच प्रशासन ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के मापदंडों के अनुसार 2 से 3 साल की, हाल ही में मां से अलग हुई और अपनी टेरिटरी बनाने वाली दो-तीन बाघिनों को चिह्नित किया। 28 नवंबर से मध्य प्रदेश और राजस्थान की जॉइंट टीम ने जंगल में बाघिन की खोज शुरू की, जिसमें 60 ट्रैप कैमरे, 8 हाथी दल और 50 फील्ड कर्मचारी सुबह 6 बजे से अंधेरा होने तक लगे रहे। 5 दिसंबर को बाघिन PN-224 की लोकेशन मिली। उसे ट्रेंकुलाइज कर रेडियो कॉलर लगाया गया। लेकिन कॉलर गिर गया और बाघिन फिर गायब हो गई। अभियान को कुछ दिन ब्रेक देने के बाद 12 दिसंबर से टीम ने खोज तेज की। 20 दिसंबर को बाघिन की लोकेशन मिली, लेकिन वह काफी सतर्क और एग्रेसिव थी। शाम तक टीम को छकाती रही। PN-224 का रेडियो कॉलर टूटने के बाद दूसरी बाघिन PN-230 को भी चयन सूची में रखा गया। लेकिन दोनों राज्यों के वन अधिकारियों की बातचीत के बाद आखिरकार PN-224 को ट्रांसलोकेट करने का निर्णय लिया गया। हाथियों और ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग कर पकड़ा
डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया- अगले दिन 21 दिसंबर को नई योजना के तहत 8 हाथियों के दल की मदद से बाघिन को घेरा गया। टीम ने इस दौरान सतर्कता और तकनीकी कौशल का पूरा उपयोग किया क्योंकि टाइगर की टेरिटरी घने जंगल, नालों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों में थी। जहां जानवर अपने आप को छुपा लेता है और तकनीक के बिना उसका मूवमेंट ट्रैक करना मुश्किल होता है। पेंच प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया में हाथियों और ट्रैकिंग तकनीक का कुशल उपयोग कर बाघिन को सुरक्षित ट्रेंकुलाइज किया। इसके बाद उसे सुरक्षित पिंजरे में रखा गया और रेस्क्यू वाहन से सुकतरा हवाई पट्टी लाया गया। एमआई-17 हेलिकॉप्टर से राजस्थान भेजा
पेंच टाइगर रिजर्व से लगभग 600 किमी दूर राजस्थान में बूंदी स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व तक बाघिन को कम समय में सुरक्षित पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टर की मदद ली गई। शाम करीब छह बजे बाघिन को हेलिकॉप्टर से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के लिए रवाना किया गया। रविवार रात 10:30 बजे सेना का हेलिकॉप्टर बाघिन PN-224 को लेकर जयपुर एयरपोर्ट पहुंचा। 8 दिन से पेंच में डेरा डाले हुई थी राजस्थान की टीम
वन अधिकारियों के अनुसार, बाघिन पीएन-224 का जन्म पेंच टाइगर रिजर्व में ही हुआ था। यह युवा और स्वस्थ बाघिन है, जिसे राजस्थान के बाघों की नस्ल सुधारने और आनुवंशिक विविधता बढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इस पूरे अभियान में मध्य प्रदेश और राजस्थान वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। राजस्थान के मुख्य वन संरक्षक सुगनाराम जाट और पशु चिकित्सक डॉ. तेजिंदर, ट्रांसलोकेशन के 8 दिन पहले से पेंच में डेरा डाले हुए थे। अभियान को पेंच टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर देवप्रसाद जे और डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह के मार्गदर्शन में पूरा किया गया। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में हो रही मॉनिटरिंग
बाघिन PN-224 को बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के सॉफ्ट एनक्लोजर में रखा गया है। एक टीम 24 घंटे बाघिन की मॉनिटरिंग कर रही है। वो नए वातावरण में कैसे एडजस्ट करती है, उसके हेल्थ स्टेटस क्या हैं, उसका व्यवहार कैसा है…सब पर नजर रखी जा रही है। सारे पैरामीटर ठीक रहे तो उसे कुछ समय बाद सॉफ्ट एनक्लोजर से हार्ड एनक्लोजर में रिलीज कर दिया जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… 961 KM लंबा कॉरिडोर जोड़ेगा चार टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में बाघों के लिए फोरलेन टाइगर कॉरिडोर बनाने का काम तेजी से हो रहा है। ये फोरलेन टाइगर कॉरिडोर 961 किमी लंबा होगा और इसकी लागत है 5500 करोड़ रुपए। इस कॉरिडोर से प्रदेश के चार प्रमुख टाइगर रिजर्व कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच सीधे जबलपुर से जुड़ेंगे। पढे़ं पूरी खबर…

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