ज्योति लवानिया| धौलपुर धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व सहित देश भर के टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना की जाएगी। टाइगर एस्टीमेशन फील्डवर्क अप्रैल से जून 2026 के बीच होने की संभावना है, जिसकी तैयारी प्रारंभ हो गई हैं। डीकेटीआर के सरमथुरा रेंज में 29 से 31 जनवरी को टाइगर एस्टीमेशन के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया है, जिसमें वनकर्मियों को प्रशिक्षण किया जाएगा। इस गणना से पता चलेगा कि देश में कितने बाघ, रिजर्व प्रे-बेस, लेपर्ड, वनस्पति आदि हैं। देशभर में ये गणना 4 साल बाद हो रही है। जिसमें के लिए धौलपुर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिसमें डब्ल्यूआईआई के दो साइंटिस्ट धौलपुर में रेंज से लेकर बीट गार्ड को प्रशिक्षित करेंगे। जिसकी तैयारियों में सरमथुरा रेंज में 29, 30 व 31 जनवरी को टाइगर एस्टीमेशन के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया है, जिसमें वनकर्मियों को प्रशिक्षण किया जाएगा। साइंटिस्ट ट्रेनिंग में पेट्रोलिंग एप एम स्ट्राइप, मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग एवं टाइगर के साथ कौन कौन से सहजीवी पैंथर की संख्या कितनी हैं आदि की जानकारी शेयर कर प्रशिक्षित करेंगे। इस बार कैमरा ट्रैप, एआई और मोबाइल ऐप से हर धारियों वाले बाघों की डिजिटल पहचान बनाई जाएगी। वन विभाग ने फील्ड लेवल पर काम शुरू कर दिया है। डिजिटल कुंडली: एआई से साफ होगा कि कौन-सा बाघ किस क्षेत्र में सक्रिय टाइगर रिजर्व में संवेदनशील इलाकों, जल स्रोतों और पगडंडियों पर कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। दिन-रात सक्रिय ये कैमरे बाघ की हर मूवमेंट को कैद करेंगे। बाद में तस्वीरों का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि इलाके में कितने बाघ हैं, नर-मादा का अनुपात क्या है और शावकों की संख्या कितनी है। वहीं टाइगर रिजर्व में वनकर्मियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। जिसमें जंगल में पगमार्क, स्कैट (मल), खरोंच के निशान और शिकार के अवशेषों का डेटा मोबाइल ऐप के जरिए सीधे सर्वर पर अपलोड किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार बाघों की धारियों को एआई सॉफ्टवेयर से मिलान कर उनकी व्यक्तिगत पहचान तय की जाएगी। इससे यह साफ होगा कि कौन-सा बाघ किस क्षेत्र में सक्रिय है। ^इस साल देशभर में बाघ सहित लेपर्ड, शाकाहारी वन्यजीवों, वनस्पतियों की पहचान टाइगर एस्टीमेशन में होगा, जो इस साल ही करना है। डीकेटीआर में ये गणना फरवरी के प्रथम सप्ताह से शुरू होगी, इसके लिए 29 से 31 जनवरी तक डब्ल्यूआईआई विशेषज्ञ वनकर्मियों को गणना के लिए ट्रेनिंग देंगे। जिसमें साइन सर्वे, ट्राजेंक्ट सर्वे, कैमरा ट्रेप सर्वे के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। -डॉ आशीष व्यास, डीसीएफ, डीकेटीआर।


