बाड़मेर और बालोतरा के अलग-अलग जिले बनने के बाद सिर्फ प्रशासनिक नक्शा ही नहीं बदला, बल्कि दोनों जिलों का राजनीतिक गणित भी पूरी तरह से बदल गया है। पंचायत और जिला परिषद स्तर पर वार्डों का पुनर्गठन कर नए सिरे से सीमाएं तय की गई हैं। बाड़मेर जिले में अब 17 पंचायत समितियां, 625 ग्राम पंचायतें और 2791 राजस्व गांव शामिल होंगे। इन्हीं के आधार पर जिले में 17 प्रधान और 37 जिला परिषद सदस्य चुने जाएंगे, जो आगे चलकर जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे। कलेक्टर टीना डाबी ने किया अंतिम प्रकाशन जिला कलेक्टर टीना डाबी ने शुक्रवार देर शाम पंचायत समिति वार्डों का अंतिम प्रकाशन कर दिया। नई सीमाओं के अनुसार अब बाड़मेर जिले में – पंचायतीराज चुनाव की तैयारी में सरकार दरअसल, राज्य सरकार पंचायतीराज चुनाव कराने की तैयारी में जुटी हुई है। इसी क्रम में जिलेवार पंचायत समितियों और जिला परिषद वार्डों का पुनर्गठन लगभग पूरा कर लिया गया है। अब आगामी चुनाव इन्हीं नई पंचायत समितियों और जिला परिषद वार्डों के आधार पर कराए जाएंगे। कहीं 1697 तो कहीं 8639 की आबादी पर वार्ड पंचायत समितियों में वार्ड गठन के दौरान जनसंख्या का संतुलन समान नहीं दिखा। कहीं वार्ड बेहद कम आबादी पर बने हैं तो कहीं दोगुनी से भी अधिक जनसंख्या वाले वार्ड बनाए गए हैं। जिला परिषद में आडेल का सिर्फ एक वार्ड जिला परिषद स्तर पर भी वार्डों में जनसंख्या का अंतर साफ नजर आता है। इस तरह आडेल पंचायत समिति का जिला परिषद में केवल एक ही वार्ड बनाया गया है, जो राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर हुआ परिसीमन वार्ड गठन में केवल जनसंख्या ही नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों का भी असर साफ दिखाई देता है। नए वार्ड, नई राजनीति नए परिसीमन के बाद जिले में स्थानीय नेताओं की रणनीति, जातीय व क्षेत्रीय समीकरण और चुनावी गणित पूरी तरह से बदलने की संभावना है। अब देखना होगा कि इन नए वार्डों के आधार पर होने वाले पंचायतीराज चुनावों में कौन किस पर भारी पड़ता है। पंचायत समिति में पंचायतों और समिति के वार्ड


