विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने रावी नदी के किनारे बसे गांव माछीवाल में खेतों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि बाढ़ के कारण किसानों के खेतों में 4-4 फुट रेत आ गई है। अक्टूबर महीने तक गेहूं की खेती हो जाती है। रेत को हटाने में बड़ी मशीनरी व डीजल-पेट्रोल की जरूरी होगी। जिसे हटा पाना आसान नहीं होगा। सीएम भगवंत मान से अनुरोध करेंगे कि माइनिंग नीति में बदलाव करके जिसका खेत उसका रेत नीति लाएं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति रावी नदी के दोनों किनारों पर हुई है। इन खेतों में धान की फसल बोई जा चुकी थी और पकने ही वाली थी कि बाढ़ आ गई। इन खेतों में पानी कब सूखेगा और फिर रेत हटेगी। इस बारे अनुमान लगा पाना भी मुश्किल है। गेहूं की फसल के बारे में सोचकर किसान चिंतित हो रहे हैं। जिसके पास खेत है, उसके पास रेत हो। इस नीति से किसान या तो स्वयं इस रेत को बेच सकेगा या किसी को बेचकर पैसा प्राप्त कर सकेगा। जिससे उसके परिवार का गुजारा होगा। रावी नदी ने उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाया है और अब रेत बहा दी है, तो उस पर अधिकार उस किसान का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा कदम होगा जो किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगा और उन्हें संकट के इस दौर से उबरने में मदद करेगा। विधायक ने कहा कि यह स्थिति रावी नदी के दोनों किनारों पर है और इस पर जल्द से जल्द ध्यान देना बेहद जरूरी है। क्योंकि यह सीधे तौर पर हजारों किसानों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।


