बाथरूम में डिलीवरी, फर्श पर गिरने से बच्चे की मौत:परिजन का आरोप- नर्स सोती रही, अस्पताल में नहीं था डॉक्टर; जांच में जुटा स्वास्थ्य विभाग

छिंदवाड़ा जिले के चौरई में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक महिला ने बाथरूम में बच्चे को जन्म दिया। फर्श पर गिरने से बच्चे की मौत हो गई। परिजन ने अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने का आरोप लगाया है। परिजन का कहना है कि नर्स की लापरवाही की वजह से बच्चे की मौत हो गई। परिजन ने प्रशासन को लिखित ज्ञापन देकर मदद मांगी है। इधर, अस्पताल की ओर से कहा गया कि बच्चे की मौत गर्भ में ही हो गई थी। मामला पिछले गुरुवार (11 सितंबर) का है। घटना के बाद महिला की अस्पताल से छुट्‌टी कर दी गई थी। मंगलवार को परिवार के लोगों ने इस बात पर हंगामा किया। बुधवार को एसडीएम के आदेश के बाद बीएमओ पीड़िता के घर पहुंचे थे। यहां पर पीड़िता के बयान दर्ज किए जाने थे। लेकिन जब उसकी तबीयत खराब मिली तो उसे दोबारा अस्पताल लाकर भर्ती किया गया है। एसडीएम प्रभात मिश्रा ने बताया कि परिजन के ज्ञापन के आधार पर जांच के निर्देश दिए हैं। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी। आरोप- बाथरूम में बच्चा गिरा, मौत
मंदरिया से आई सोना कहार को गुरुवार रात करीब 2 बजे 108 एम्बुलेंस से प्रसव पीड़ा के चलते चौरई स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। आरोप है कि एम्बुलेंस में जच्चा और उसके परिजन थे, बावजूद इसके शासन की आशा कार्यकर्ता मौके पर नहीं पहुंचीं। अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे, इसलिए नर्स ने प्राथमिक जांच कर कहा कि डिलीवरी में अभी समय है। जच्चा को बेड देकर वह लौट गई। कुछ देर बाद महिला को तेज दर्द होने लगा। आरोप है कि उसकी सास ने तीन बार नर्स को जगाकर मदद मांगी, लेकिन नर्स हर बार सोती रही और कहती रही कि डिलीवरी में अभी समय है। नर्स की अनदेखी से मजबूर होकर सास ने बहू को बाथरूम ले जाकर पेशाब कराना चाहा। वहीं दर्द के बीच महिला ने बच्चे को जन्म दिया। नवजात फर्श पर गिरा और रोते हुए दम तोड़ दिया। अस्पताल से बताया- बच्चा गर्भ में ही मृत था
सुबह परिजन को ड्यूटी डॉक्टर से मिली रिपोर्ट में बताया गया कि बच्चा गर्भ में ही मृत था। डॉक्टर ने कहा कि गर्भ में बच्चे की मौत गर्भावस्था के किसी भी चरण में हो सकती है। हालांकि गायनिक डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना पूरी जांच के यह तय नहीं किया जा सकता कि बच्चे की मौत गर्भ में हुई थी। आमतौर पर ऑपरेशन कर ही बच्चे को बाहर निकालना पड़ता है। बावजूद इसके अस्पताल ने परिजन से दस्तावेजों पर साइन करवा कर मृत बच्चा सौंप दिया और डिस्चार्ज चार्ज कर दिया। दोपहर में अधिकारियों का दौरा, रात में लापरवाही से घटना
घटना वाले दिन दोपहर में संभागीय कमिश्नर धनंजय सिंह, जिला कलेक्टर शीलेंद्र सिंह, एसडीएम प्रभात मिश्रा सहित अधिकारियों ने अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। मातृत्व वंदना योजना की समीक्षा के साथ सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन रात होते-होते गंभीर लापरवाही सामने आई और घटना घट गई।

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