सतीश कपूर | अमृतसर मंदिरों का गर्मी और सर्दी के मौसम में खुलने और बंद होने का अलग-अलग समय होता है। परंतु शहर के लोहगढ़ गेट के पास स्थित बाजार खूह सुनियारियां कटड़ा दूलो में एक ऐसा मंदिर (स्थान) है, जो साल में सिर्फ एक महीना ही खुलता है। इस मंदिर का नाम बाबे लालू जसराय जी मंदिर है। जनवरी माह की संक्रांति से लेकर फरवरी माह की संक्रांति तक एक महीने यहां खन्ना परिवार के बेटों के मुंडन, सिर की चोटियां और जनेऊ उतारे जाते हैं। इस स्थान पर तीन पीड़ियों से पुरोहित की सेवा निभा रहे विपन त्रिखा और विनय शर्मा बताते हैं कि भारत-पाक विभाजन से करीब 100 साल पहले श्री बाबे लालू जसराय जी की हवेली पाकिस्तान के मुल्तान दयालपुर शहर में थी। भारत-पाक विभाजन के बाद उस हवेली की एक ईंट लाकर यहां पर स्थान (मंदिर) बना दिया गया ताकि पाकिस्तान से आए खन्ना, कपूर, सेठ, मेहरे, चोपड़ा, तालवाड़ समेत खत्री परिवार की 700 जातियां यहां आकर अपने परिवार की सुख-शांति मांग सकें। पुरोहित विपन त्रिखा के अनुसार यह देश का ऐसा पहला मंदिर है जो साल में सिर्फ एक महीना ही खुलता है। इसमें खन्ना परिवार के बेटे जब तक अपनी सिर की चोटियों नहीं उतारते उनकी शादियां नहीं की जातीं। मन्नत पूरी होने पर बाबे लालू जसराय को श्रद्धा स्वरूप भेट चढ़ाते हैं। पुरोहित विपन, प्रवीण शर्मा, मनमोहन और विनय शर्मा के अनुसार बाबे लालू जसराय जी की हवेली लाहौर पाकिस्तान के दयालपुर इलाके में थी। हवेली के राजा के घर में कोई औलाद नहीं होती थी। पुरोहितों के मुताबिक श्री लालू नामक सारस्वत ब्राह्मण ने जिस समय खत्रियों का वंश नष्टप्राय और वंश की वृद्धि नहीं हो रही थी तभी उन्होंने पाकिस्तान में हिंगलाज माता मंदिर में जाकर कई वर्षों तक तपस्या की। इसके बाद मां ज्वाला जी को प्रसन्न किया। लालू नामक ब्राह्मण से प्रसन्न होकर मां ज्वाला जी ने आशीर्वाद दिया कि तुम्हारा मनोरथ सिद्ध होगा। इसके बाद उन्होंने कहा कि मेरा दिया पुत्र मेरा ही अंश है वह लंगूर वीर होगा। उसे कभी भी दुर्वचन नहीं बोलना और बेटे का नाम जसराज रखना। बेटा जसराय जब 5 वर्ष के हुए तो एक दिन घर के ही एक आले (छोटे से कमरे) में ध्यान लगाकर बैठे हुए थे। तभी उनकी माता ने उन्हें बार-बार पुकारा पर जसराय ने कोई जवाब नहीं दिया। माता ने क्रोध में आकर उन्हें दुर्वचन बोलते कहा कि क्या आले में समा गए हो। इतना कहते ही आला फट गया और जसराय उसके अंदर समाने लगे। इसी दौरान उनकी माता ने उनकी चुटिया पकड़ ली। बेटा तो आले में समा गया पर उनकी चुटिया मां के हाथ में रह गई। इसके बाद खत्री विशेषकर खन्ना परिवार हर साल माघ महीने में अपने बेटे के सिर की चोटियां उतार श्री बाबे लालू जसराय के प्रति अपना सम्मान प्रगट करते हैं।


