बामसेफ-भारत मुक्ति मोर्चा के अधिवेशन को रोकने का आरोप:RSS-BJP पर षड्यंत्रपूर्वक रोकने का आरोप, ADM को सौंपा ज्ञापन

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा और राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सिरोही के ADM को सौंपा गया है। इस ज्ञापन में आरएसएस और बीजेपी पर बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन को षड्यंत्रपूर्वक रोकने का आरोप लगाया गया है। बहुजन क्रांति मोर्चा सिरोही के जिला संयोजक एडवोकेट सुंदर लाल मोसलपुरिया ने बताया कि यह अधिवेशन कटक (ओडिशा) में आयोजित होने वाला था। इसका मुख्य उद्देश्य ओबीसी की जाति आधारित जनगणना पर देश भर के वक्ताओं द्वारा विश्लेषण करना था। अधिवेशन रोके जाने के कारण ओबीसी सहित देश भर के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। संगठनों ने भारत सरकार और ओडिशा सरकार के इस कृत्य को संविधान विरोधी बताते हुए इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आरएसएस और बीजेपी की साजिश से अधिवेशन को रोका जाना संविधान की भावना का उल्लंघन है। ये अनुच्छेद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता और संगठन बनाने के अधिकार की रक्षा करते हैं। इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का भी हनन हुआ है। संगठनों ने जोर देकर कहा कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस विरोध को और मजबूत करने के लिए, संगठनों ने घोषणा की है कि 22 फरवरी को नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पर एक विशाल रैली निकाली जाएगी। इस रैली का उद्देश्य अधिवेशन रोकने के खिलाफ जन जागरण करना और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग को तेज करना है। यह ज्ञापन एडवोकेट सुंदर लाल मोसलपुरिया के नेतृत्व में सौंपा गया। कार्यक्रम में एडवोकेट सुंदरलाल मोसलपुरिया, एडवोकेट नरेंद्र पाल सिंह राव, एडवोकेट दशरथ सिंह आढा, मोहनलाल मीणा, नगाराम, संजय माली, आनंद देव सुमन, एडवोकेट रामलाल राणा, नथाराम नेमाराम, धन्नाराम, हरिओम दत्ता, गोविंद राणा मुन्नवर हुसैन सहित दर्जन भर प्रमुख कार्यकर्ता और अधिवक्ता उपस्थित रहे। एडवोकेट दशरथ सिंह आढ़ा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा राजस्थान सिरोही ने कहा, “यह न केवल हमारे संगठनों के अधिकारों का हनन है, बल्कि पूरे बहुजन समाज की आवाज को दबाने की कोशिश है। हम संवैधानिक लड़ाई लड़ेंगे और रैली के माध्यम से अपनी मांगों को और मजबूती से रखेंगे।”यह घटना बहुजन संगठनों के बीच बढ़ते असंतोष को दर्शाती है, और आने वाले दिनों में नागपुर रैली पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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