बारां से 40 किलोमीटर दूर स्थित रियासतकालीन शेरगढ़ दुर्ग के जीर्णोद्धार की योजना तैयार हो गई है। प्रशासन ने इस कार्य के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की स्वीकृति दे दी है। टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किले की क्षतिग्रस्त दीवारों और भवनों की मरम्मत की जाएगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। किले तक पहुंचने वाले रास्ते को सुगम बनाया जाएगा। मार्ग में जगह-जगह दिशा-सूचक बोर्ड लगाए जाएंगे। पर्यटन विभाग शेरगढ़ को पर्यटक बुक में शामिल करेगा। किले की जानकारी वाली बुकलेट भी तैयार की जाएगी। इससे राज्य में आने वाले पर्यटकों को दुर्ग के बारे में जानकारी मिल सकेगी। पुरातत्व विभाग ने गांव की हवेलियों और भवनों का निरीक्षण किया है। विभाग ने साढ़े 5 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भी भेजा है। इस प्रस्ताव में गांव को हेरिटेज विलेज के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें पुराने भवन, हवेलियां और मंदिरों के संरक्षण का काम शामिल है। अगले माह से किले के जीर्णोद्धार का काम शुरू होने की संभावना है। वर्तमान में किले में पर्यटकों की आवाजाही कम है। कई जगह दीवारें और भवन क्षतिग्रस्त हैं। झाड़ियों के कारण पहुंच मार्ग भी कठिन हो गया है। पर्यटन विभाग के अनुसार शेरगढ़ का किला 800 ईस्वी में बना था। इस दुर्ग का नाम पहले कोषवर्धन था। इसके बाद शेरशाह सूरी ने इस पर कब्जा किया, तो यह शेरगढ़ हो गया। किले के अंदर मंदिर और विभिन्न भवन है। यहां पर संरक्षण नहीं होने से यह जर्जर हो रहे हैं। अब इनका संरक्षण करवाने के लिए प्रपोजल बनवाए हैं। शेरगढ़ गांव को भी राज्य सरकार द्वारा हेरिटेज विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटन विभाग के सिराज कुरैशी ने बताया कि बारां जिले के शेरगढ़ दुर्ग में डेढ़ करोड़ रुपए से जीर्णोद्धार किया जाएगा। पूर्व में करीब 8 करोड़ रुपए से जीर्णोद्धार किया गया था। अब भवन व क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत भी होगी। पिछले महीनों के दौरान शेरगढ़ को हेरिटेज विलेज बनाने के प्रस्ताव भेजे गए थे। उच्चस्तर पर विचाराधीन है। फिर यहां पर्यटन बढ़ने के आसार हैं। शेरगढ़ दुर्ग को लेकर कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है।


