जयपुर के एसएमएस अस्पताल में हाल ही में हुई आगजनी की घटना के बाद राज्य सरकार ने अस्पतालों में सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इस घटना में कई मरीजों की जान जाने के बाद चिकित्सा, शिक्षा विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने संयुक्त रूप से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। नई एसओपी के तहत बारां जिला अस्पताल सहित सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में पीडब्ल्यूडी चौकी की स्थापना की जाएगी। इन चौकियों पर 24 घंटे प्लम्बर और इलेक्ट्रीशियन तैनात रहेंगे, जबकि दिन के समय कारपेंटर और वेल्डर भी उपलब्ध रहेंगे। इससे किसी भी तकनीकी खराबी या आपात स्थिति में तुरंत सुधार किया जा सकेगा। पीडब्ल्यूडी चौकी के माध्यम से अस्पतालों में लगे महत्वपूर्ण उपकरणों जैसे चिलर प्लांट, एयर कंडीशनर, डीजल जनरेटर, ऑक्सीजन पाइपलाइन, लिफ्ट, फायर अलार्म सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों का रखरखाव किया जाएगा। मरीजों और स्टाफ की शिकायतों के लिए 24 घंटे संचालित होने वाली हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी। शिकायतों का निपटारा पीडब्ल्यूडी की देखरेख में ठेकेदार द्वारा किया जाएगा। समस्या के समाधान के बाद ही संबंधित ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा। पहले यह मेंटिनेंस कार्य अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर पर करता था, लेकिन अब पूरी जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को सौंपी गई है। पीडब्ल्यूडी एक्सईएन रचित शर्मा ने बताया कि नई एसओपी के अनुसार अस्पताल भवन की निर्माण लागत का 2 प्रतिशत हिस्सा वार्षिक रखरखाव निधि के रूप में पीडब्ल्यूडी को दिया जाएगा। यह राशि राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसाइटी के माध्यम से जारी की जाएगी। इस संबंध में जिला कलेक्टर के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने जिला अस्पताल भवन का निरीक्षण कर लगभग 53 लाख रुपए का एस्टिमेट तैयार किया, जिसमें से करीब 40 प्रतिशत राशि अस्पताल प्रबंधन द्वारा पीडब्ल्यूडी को जारी कर दी गई है। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हर साल होगा भवनों का सर्वे
एसओपी के तहत पीडब्ल्यूडी हर वर्ष अस्पताल भवनों का सर्वे कर फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करेगी। इसमें रिसाव मुक्त प्लबिंग, जलरोधी छतें, प्लास्टर मरम्मत, सुरक्षित इलेक्ट्रिकल सिस्टम, टूटी टाइल्स, दरवाजों और खिड़कियों की मरम्मत, पंखों और लाइट्स का मेंटिनेंस तथा संरचनात्मक क्षति से बचाव के लिए पेड़ों की जड़ों को हटाने जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। बारां जिला अस्पताल में प्रत्येक 8 घंटे की शिफ्ट में एक प्लम्बर, एक इलेक्ट्रीशियन और एक सहायक तैनात रहेगा, जिनकी निगरानी के लिए जेईएन स्तर का सुपरवाइजर भी नियुक्त किया जाएगा।


