प्रशासन ने हालात पर नजर रखने के लिए संबंधित विभागों को चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। राजस्व, स्वास्थ्य, सिंचाई और पुलिस विभाग की टीमों को सतलुज किनारे तैनात किया गया है। राहत और बचाव कार्य के लिए नावों और ट्रैक्टर-ट्रालियों की व्यवस्था की गई है। मॉक ड्रिल में आपदा प्रबंधन टीम ने गांवों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया समझाई गई है। वन विभाग ने दरिया किनारे कटाव रोकने के लिए रेत से भरी बोरियों की दीवार खड़ी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा खतरा उन जगहों पर है जहां दरिया का बहाव तेज है और किनारे कच्चे हैं। ऐसे इलाकों में अतिरिक्त टीमें लगाई गई हैं। स्कूलों और पंचायत भवनों को अस्थायी ठिकानों के तौर पर चिन्हित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमें तैनात की हैं ताकि बाढ़ प्रभावित गांवों में दवाइयों और प्राथमिक उपचार की सुविधा दी जा सके। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। दरिया का जलस्तर बढ़ने के कारण हालात गंभीर हो रहे हैं, लेकिन समय रहते कदम उठाकर नुकसान कम करने की कोशिश की जा रही है। भास्कर न्यूज | लुधियाना लगातार हो रही बरसात से सतलुज दरिया का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। 15 दिन पहले जहां लेवल 50 इंच दर्ज किया गया था, वहीं अब यह बढ़कर 72 इंच तक पहुंच गया है। दरिया का पानी आसपास के गांवों में घुसने लगा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर तैयारी शुरू कर दी है। मॉक ड्रिल करवाई गई है और वन विभाग की टीमों ने किनारों पर रेत की बोरियां लगानी शुरू कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि दरिया का लेवल खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है और रोजाना इसमें बढ़ोतरी हो रही है। सतलुज किनारे बसे गांवों में पानी घुसने से खेत डूबने लगे हैं। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो दिनों से पानी तेजी से गांवों की ओर आ रहा है। कई जगह कच्चे रास्ते टूटने लगे हैं। लोगों ने प्रशासन से राहत इंतजाम बढ़ाने की मांग की है।


